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मरी हुई मछलियां मिलने से हड़कंप, प्रदूषण की आशंका से बढ़ी चिंता

सुलतानपुर। धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाली नगरी सुलतानपुर के प्रसिद्ध आस्था स्थल सीताकुण्ड धाम पर मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब आदि गंगा मां गोमती के जल में सैकड़ों की संख्या में मरी हुई मछलियां तैरती दिखाई दीं। इस अप्रत्याशित घटना को देखकर घाट पर पहुंचे श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों में चिंता और आक्रोश का माहौल बन गया। लोगों ने नदी के जल में प्रदूषण बढ़ने अथवा किसी जहरीले रासायनिक पदार्थ के मिलने की आशंका जताई है।

सुबह जैसे ही लोगों की नजर गोमती नदी में तैरती मृत मछलियों पर पड़ी, देखते ही देखते बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घाट पर पहुंचने लगे। कई श्रद्धालुओं ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि गोमती नदी क्षेत्र की जीवनरेखा होने के साथ-साथ करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र भी है। ऐसे में नदी में इस प्रकार बड़ी संख्या में मछलियों का मृत पाया जाना पर्यावरणीय संकट का संकेत हो सकता है।

घटना की सूचना मिलते ही गोमती मित्र मण्डल के पदाधिकारी और सदस्य भी मौके पर पहुंच गए। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मदन सिंह और प्रबंधक राजेंद्र शर्मा सहित कई पदाधिकारियों ने नदी तट का निरीक्षण किया तथा पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गोमती नदी की स्वच्छता, संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं नदी के स्वास्थ्य और जलीय जीवों के अस्तित्व पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

मौके पर मौजूद लोगों ने आशंका जताई कि किसी स्थान से नदी में प्रदूषित जल या रासायनिक पदार्थ छोड़े जाने के कारण मछलियों की मौत हुई हो सकती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी वैज्ञानिक जांच नहीं कराई गई तो इसका असर केवल जलीय जीवों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

गोमती मित्र मण्डल ने प्रशासन, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मत्स्य विभाग से तत्काल मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। संगठन ने नदी के जल का नमूना लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण कराने तथा मछलियों की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने की मांग की है। साथ ही यदि किसी फैक्ट्री, नाले अथवा अन्य स्रोत से प्रदूषण फैलाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि गोमती नदी केवल जलधारा नहीं बल्कि लाखों लोगों की आजीविका, संस्कृति और आस्था का आधार है। ऐसे में नदी को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी है। उन्होंने कहा कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई और नदी की जल गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

सीताकुण्ड धाम पर हुई इस घटना ने एक बार फिर गोमती नदी के संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय जवाबदेही के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल स्थानीय लोगों, पर्यावरण प्रेमियों और श्रद्धालुओं की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई तथा जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मछलियों की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।

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Suyash Chitranshi
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