सुलतानपुर। जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को कथित रूप से जबरन हिरासत में लिए जाने के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव एवं अधिवक्ता अशोक सिंह बिसेन ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार बताते हुए कहा कि जनहित के मुद्दों पर शांतिपूर्ण आंदोलन करने वालों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश का नौजवान, छात्र और आम जनता अपने अधिकारों और जनहित के मुद्दों को लेकर आवाज उठा रही है, लेकिन सरकार लोकतांत्रिक विरोध और भूख हड़ताल जैसे शांतिपूर्ण आंदोलनों को कुचलने का काम कर रही है। बिसेन ने दावा किया कि इस तरह की कार्रवाई को युवा और आम जनता कभी माफ नहीं करेगी।
अशोक सिंह बिसेन ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। यदि किसी आंदोलनकारी को जबरन हिरासत में लिया जाता है या उसके विरोध प्रदर्शन को बलपूर्वक समाप्त किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं और मौलिक अधिकारों के विपरीत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित से जुड़े मुद्दों पर उठ रही आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है, जबकि जनता रोजगार, शिक्षा, महंगाई और किसानों से जुड़े सवालों का जवाब चाहती है।
समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले का उल्लेख करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि भगवान श्रीराम के मंदिर में चढ़ाए गए चढ़ावे में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय है।
अशोक सिंह बिसेन ने कहा कि सरकार इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने के बजाय इसे दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को उछालकर जनता का ध्यान मूल प्रश्नों से भटकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जा सकती।
अशोक सिंह बिसेन ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगभग 94 हजार प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने या उनके विलय की प्रक्रिया से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी और गरीब, पिछड़े, वंचित, ग्रामीण तथा अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, शिक्षक और छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि विद्यालयों की संख्या कम होगी तो ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने इसे शिक्षा विरोधी नीति बताते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ऐसे किसी भी निर्णय का विरोध करती रहेगी।
सपा नेता ने कहा कि किसान खेत में मेहनत कर रहा है, जवान सीमा पर देश की सुरक्षा कर रहा है और युवा रोजगार व बेहतर भविष्य की उम्मीद में संघर्ष कर रहा है। ऐसे समय में सरकार को रोजगार सृजन, शिक्षा और युवाओं के भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार युवाओं, शिक्षकों और छात्रों के हितों की अनदेखी कर रही है। उनका कहना था कि रोजगार, शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे आने वाले समय में राजनीति के केंद्र में रहेंगे।
अशोक सिंह बिसेन ने कहा कि समाजवादी पार्टी जनहित के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी और किसानों, युवाओं, पिछड़ों, दलितों, वंचितों, महिलाओं तथा अल्पसंख्यकों को साथ लेकर राजनीतिक संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता वर्तमान सरकार को उसके कार्यों का जवाब देगी। साथ ही उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने का विश्वास भी व्यक्त किया।
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