सुलतानपुर: स्कॉर्पियो में नई अवैध पिस्टल चलाते समय चली गोली, आजाद वर्मा की मौत का पुलिस ने किया खुलासा; दो आरोपी गिरफ्तार

सुलतानपुर। गोसाईगंज थाना क्षेत्र के कारीबहार में 29 जून को हुई आजाद वर्मा की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए घटना की पूरी तस्वीर सामने रखी है। पुलिस के अनुसार यह मामला किसी बाहरी हमले या सुनियोजित गोलीकांड का नहीं, बल्कि स्कॉर्पियो में नई अवैध पिस्टल चलाने के दौरान हुए एक्सीडेंटल फायर का निकला। जांच में सामने आया कि गोली गलती से चलने पर आजाद वर्मा की कमर में जा लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई।

पुलिस का कहना है कि घटना के बाद घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के बजाय उसके साथी उसे लेकर काफी देर तक इधर-उधर घूमते रहे। बाद में पहले सुलतानपुर और फिर लखनऊ ले जाया गया। इस बीच मामले को दूसरी दिशा देने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और अलग कहानी भी प्रसारित की गई। हालांकि वैज्ञानिक जांच, फॉरेंसिक साक्ष्यों और तकनीकी विवेचना के आधार पर पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा कर दिया।

इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त काली स्कॉर्पियो, अवैध पिस्टल, खोखा कारतूस तथा अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि फरार तीसरे आरोपी की तलाश जारी है और मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस के अनुसार विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि घटना वाले दिन आजाद वर्मा अपने तीन साथियों—अभिषेक वर्मा पुत्र विजय बहादुर वर्मा उर्फ कल्लू, अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा तथा अमन वर्मा—के साथ एक काली स्कॉर्पियो में सवार था। चारों के पास एक नई अवैध पिस्टल थी, जिसे चलाने का प्रयास किया जा रहा था।

इसी दौरान अभिषेक वर्मा पुत्र विजय बहादुर से गलती से ट्रिगर दब गया और गोली चल गई। गोली पहले स्कॉर्पियो की सीट को चीरते हुए निकली और फिर आजाद वर्मा की कमर में जा लगी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद वाहन में मौजूद सभी लोग घबरा गए।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गोली लगने के बाद घायल आजाद वर्मा को तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया। इसके बजाय उसके साथी काफी देर तक अलग-अलग स्थानों पर घूमते रहे। बाद में उसे सुलतानपुर लाया गया और फिर बेहतर इलाज के नाम पर लखनऊ ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि घायल को समय पर चिकित्सीय सहायता मिलती तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। इसी पहलू को भी विवेचना में शामिल किया गया है।

पुलिस के मुताबिक घटना के बाद वास्तविकता छिपाने और मामले को दूसरी दिशा देने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर एक भ्रामक वीडियो और अलग कहानी प्रसारित की गई। शुरुआती दौर में इस वीडियो के आधार पर कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई थीं। हालांकि पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, घटनास्थल के निरीक्षण, डिजिटल विश्लेषण और वैज्ञानिक जांच के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ते हुए वायरल दावों को गलत साबित किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी रही। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर गोसाईगंज थाना पुलिस ने लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र स्थित वृंदावन योजना सेक्टर-16 से दो आरोपियों—अभिषेक वर्मा पुत्र विजय बहादुर वर्मा तथा अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा—को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य बताए, जिसके बाद पुलिस ने उनकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त वाहन और अन्य साक्ष्य बरामद किए।

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पकरौली बाईपास रेलवे ओवरब्रिज के पास से घटना में प्रयुक्त काली स्कॉर्पियो बरामद की। इसके बाद फील्ड यूनिट और वैज्ञानिक टीम ने वाहन की गहन जांच की। जांच के दौरान स्कॉर्पियो से घटना में प्रयुक्त अवैध पिस्टल, एक खोखा कारतूस, खून के निशान तथा सीट पर गोली के प्रवेश (एंट्री) और निकास (एग्जिट) के स्पष्ट निशान मिले। पुलिस का कहना है कि यही वैज्ञानिक साक्ष्य इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुए और इन्हीं के आधार पर घटना की वास्तविकता सामने आई।

पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। वहीं घटना में शामिल तीसरे आरोपी अमन वर्मा की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

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Suyash Chitranshi
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