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सुलतानपुर तहसील सदर में आपात बैठक कर दस्तावेज़ लेखक संघ ने जताया विरोध, पूर्व विधायक के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा मांगपत्र

सुलतानपुर। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकरण एवं निबंधन विभाग की नई व्यवस्था लागू किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ दस्तावेज़ लेखक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को तहसील सदर परिसर में आयोजित आपात बैठक में दस्तावेज़ लेखकों ने नए शासनादेश को जनविरोधी बताते हुए उसका कड़ा विरोध किया। बैठक के बाद संघ के पदाधिकारियों ने समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक अनूप संडा के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक मांगपत्र भेजकर शासनादेश को तत्काल वापस लेने की मांग की।

बैठक में मौजूद दस्तावेज़ लेखकों ने आरोप लगाया कि पंजीकरण एवं निबंधन विभाग द्वारा 4 जून को जारी किए गए पत्र के अनुसार अब जमीनों और अन्य दस्तावेजों के पंजीकरण की प्रक्रिया चुनिंदा निजी संस्थाओं के माध्यम से कराए जाने की तैयारी की जा रही है। संघ का कहना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो प्रदेश भर में रजिस्ट्री व्यवस्था से जुड़े लाखों अधिवक्ता, बैनामा लेखक, स्टांप विक्रेता, कंप्यूटर ऑपरेटर तथा मुंशी बेरोजगारी की मार झेलने को मजबूर हो जाएंगे।

दस्तावेज़ लेखक संघ के सदस्यों ने कहा कि प्रदेश सरकार एक ओर युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के दावे करती है, जबकि दूसरी ओर इस तरह के फैसले लाखों परिवारों की आजीविका पर सीधा असर डालेंगे। उन्होंने कहा कि वर्षों से रजिस्ट्री और दस्तावेज़ लेखन से जुड़े लोग इस व्यवस्था की रीढ़ रहे हैं और उनकी उपेक्षा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी।

इस दौरान सपा प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक अनूप संडा ने भी भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार निजीकरण को बढ़ावा देने का काम कर रही है। उनका आरोप था कि सरकार की नीतियां देश की कमाई और जनता के अधिकारों को चुनिंदा कॉर्पोरेट घरानों के हाथों सौंपने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

अनूप संडा ने कहा कि दस्तावेज़ लेखक केवल एक पेशेवर वर्ग नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रजिस्ट्री संबंधी महत्वपूर्ण कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को समाप्त कर किसी निजी कंपनी को इसका एकाधिकार देना लोकतांत्रिक और सामाजिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।

सदर विधायक के इस मुद्दे पर खुलकर समर्थन में न आने को लेकर भी अनूप संडा ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जनता को ऐसे जनप्रतिनिधियों से उम्मीद रखनी चाहिए जो जनता के संघर्ष और समस्याओं के साथ खड़े हों। उन्होंने आरोप लगाया कि भय और भ्रम की राजनीति के सहारे सत्ता तक पहुंचने वाले लोग आम जनता की पीड़ा और समस्याओं को समझने में विफल साबित हो रहे हैं।

बैठक के अंत में दस्तावेज़ लेखक संघ के पदाधिकारी पीयूष तिवारी, अजीम किदवई, श्याम बहादुर सिंह, मोहम्मद अकरम और अच्छे लाल यादव सहित अन्य सदस्यों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि इस शासनादेश को तत्काल वापस नहीं लिया गया तो तहसील सदर में कार्यरत सभी दस्तावेज़ लेखक, स्टांप विक्रेता और कंप्यूटर ऑपरेटर अनिश्चितकाल के लिए रजिस्ट्रेशन कार्य का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। संघ का कहना है कि अपने अधिकारों और रोजगार की रक्षा के लिए वे किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं।

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Suyash Chitranshi
Suyash Chitranshi