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फरियादी पिता को देख एसपी चारू निगम ने रुकवाया काफिला, सुनी पीड़ा, गोसाईंगंज प्रकरण की मांगी रिपोर्ट

सुलतानपुर। पुलिस अधीक्षक चारू निगम का संवेदनशील और जनसरोकारों से जुड़ा चेहरा सोमवार को उस समय देखने को मिला, जब पुलिस कार्यालय के मुख्य गेट पर अपनी फरियाद लेकर पहुंचे एक पीड़ित पिता की व्यथा सुनकर उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया। मीडिया के सामने अपनी पीड़ा बयां कर रहे व्यक्ति को देखकर एसपी स्वयं वाहन से उतरीं और मौके पर पहुंचकर उसकी समस्या सुनी। इस दौरान उन्होंने पूरे मामले की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए।

जानकारी के अनुसार मामला गोसाईंगंज कोतवाली क्षेत्र के सैफुल्लागंज गांव से जुड़ा है। पीड़ित पिता का आरोप है कि उसके पुत्र के साथ कुछ लोगों ने बेरहमी से मारपीट की। उनका कहना है कि पहले से दर्ज एक मुकदमे में समझौते का दबाव बनाया जा रहा था और समझौता न करने पर युवक को निशाना बनाया गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना की शिकायत पुलिस से किए जाने के बावजूद अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।

इसी शिकायत को लेकर पीड़ित पिता सोमवार को पुलिस कार्यालय पहुंचा था। संयोगवश उसी समय पुलिस अधीक्षक चारू निगम कार्यालय से निकल रही थीं। मीडिया कर्मियों से बात कर रहे फरियादी को देखकर उन्होंने तत्काल अपना काफिला रुकवाया और मौके पर पहुंचकर पूरी घटना की जानकारी ली। एसपी ने शिकायतकर्ता से विस्तार से बातचीत की और उसे निष्पक्ष जांच तथा उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

मामले को गंभीरता से लिया, अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट

फरियादी की शिकायत सुनने के बाद पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जानकारी तलब की। उन्होंने घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उस पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

एसपी की इस पहल को मौके पर मौजूद लोगों ने सराहा। आमतौर पर उच्च अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है, लेकिन फरियादी की शिकायत को तत्काल सुनकर चारू निगम ने यह संदेश दिया कि पुलिस प्रशासन जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है और हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा।

कोतवाल बोले- नहीं मिला कोई लिखित प्रार्थना पत्र

वहीं इस मामले में गोसाईंगंज कोतवाल अखंड देव मिश्र का अलग पक्ष सामने आया है। उनका कहना है कि पीड़ित पक्ष की ओर से थाने पर अब तक कोई लिखित प्रार्थना पत्र नहीं दिया गया है। उन्होंने बताया कि यदि शिकायतकर्ता लिखित शिकायत देता है तो मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल इस प्रकरण को लेकर पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है और अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट तथा आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद उन्हें न्याय मिलेगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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Suyash Chitranshi
Suyash Chitranshi