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पेपर लीक के खिलाफ एसएफआई-डीवाईएफआई का प्रदर्शन, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन; परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग

सुल्तानपुर। देशभर में लगातार सामने आ रही परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं के विरोध में छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और भारत की जनवादी नौजवान सभा (डीवाईएफआई) ने संयुक्त रूप से जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट शिव प्रसाद को सौंपते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करने तथा पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं ने कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों की मेहनत और आर्थिक संसाधन लगाने वाले अभ्यर्थियों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है। ऐसे में सरकार को परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

एसएफआई के राज्य अध्यक्ष पार्थ सारथी द्विवेदी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 89 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जो शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा संचालन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं और सरकार को इसकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।

एसएफआई के जिला सचिव दुर्गेश यादव ने आरोप लगाया कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को सौंपे जाने के कारण जवाबदेही का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि जब तक परीक्षा संचालन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और उत्तरदायी नहीं बनाया जाएगा, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाना मुश्किल होगा।

वहीं डीवाईएफआई के जिला सचिव विवेक विक्रम सिंह ने प्रयागराज में प्रतियोगी छात्रों और कोचिंग संस्थानों के खिलाफ की गई कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने वाले छात्रों को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए एसएफआई के जिलाध्यक्ष बालकृष्ण मिश्र ने पेपर लीक की घटनाओं के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए एनटीए को तत्काल भंग कर नई और जवाबदेह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

संगठनों ने अपने ज्ञापन में मांग की कि पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, परीक्षा केंद्रों और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए तथा युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को तत्काल रोका जाए।

प्रदर्शन में रवि प्रसाद, सुनील पाल, मो. अरशद, ऋषभ यादव, शिल्पी, काजल, अमित, अंकित समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और युवा कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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Suyash Chitranshi
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