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10 हजार घंटों की गूंज और अटूट आस्था का केंद्र है सुलतानपुर का मरी माई धाम, मां दिलेश्वरी के दरबार से कोई नहीं लौटता खाली हाथ

सुलतानपुर। उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जनपद की लंभुआ तहसील स्थित शाहपुर हरिवंश गांव में मौजूद मरी माई धाम (पापर धाम) आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है। इस पवित्र धाम की सबसे बड़ी विशेषता यहां बंधे 10 हजार से अधिक घंटे हैं, जो भक्तों की अटूट श्रद्धा, विश्वास और पूरी हुई मनोकामनाओं के प्रतीक माने जाते हैं। मान्यता है कि इस धाम में विराजमान मां दिलेश्वरी (जगदंबा माता) अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं, इसलिए यहां आने वाला कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ वापस नहीं लौटता।

मरी माई धाम के नाम के पीछे छिपी है अनोखी कहानी

स्थानीय लोगों और मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं के अनुसार, वर्षों पहले यहां मौजूद नीम के विशाल वृक्ष की पहली पीढ़ी में जगदंबा माता स्वयं प्रकट हुई थीं। तभी से यह स्थान श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बन गया। लोगों का विश्वास है कि माता आज भी इस धाम में विराजमान हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। यही कारण है कि आसपास ही नहीं बल्कि दूर-दराज के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।

1961 में गिर गया था पहला नीम का पेड़

मंदिर के पुजारी अयोध्या प्रसाद दुबे बताते हैं कि जिस नीम के वृक्ष में माता के प्रकट होने की मान्यता है, उसकी पहली पीढ़ी का पेड़ वर्ष 1961 में गिर गया था। इसके बाद उसी स्थान पर दूसरा नीम का पौधा लगाया गया, जो आज एक विशाल वृक्ष का रूप ले चुका है। वर्तमान में यह पेड़ लगभग 63 वर्ष पुराना है और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

मंगलवार को लगता है भव्य मेला, उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

मरी माई धाम में प्रत्येक मंगलवार को विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है। इस दिन यहां हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में भव्य मेले का आयोजन भी किया जाता है, जहां धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है।

श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर यहां घंटा चढ़ाते हैं। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के चलते मंदिर परिसर में 10 हजार से अधिक घंटे बंध चुके हैं, जो इस धाम की पहचान बन गए हैं। जब हवा चलती है तो इन घंटों की मधुर ध्वनि पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है।

मां दिलेश्वरी के दरबार में पूरी होती हैं मनोकामनाएं

मंदिर के पुजारी अयोध्या प्रसाद दुबे के अनुसार, यहां प्रकट हुई जगदंबा माता को मां दिलेश्वरी के नाम से जाना जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे मन से मां के दरबार में की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती। यही वजह है कि हर वर्ष हजारों लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं और पूरी होने पर धन्यवाद स्वरूप घंटा चढ़ाते हैं।

धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन रहा धाम

मरी माई धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि धीरे-धीरे सुलतानपुर जिले के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में भी अपनी पहचान बना रहा है। यहां की पौराणिक मान्यताएं, हजारों घंटों से सजा मंदिर परिसर और नीम के वृक्ष से जुड़ी अद्भुत कथा श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करती है।

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Suyash Chitranshi
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