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कुड़वार गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा, ब्लैक मार्केटिंग और अभद्रता के आरोपों से मचा हड़कंप

सुलतानपुर। जनपद सुलतानपुर के कुड़वार क्षेत्र स्थित कमला इंडियन गैस सर्विस पर उपभोक्ताओं का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब गैस सिलेंडर की किल्लत और कथित अनियमितताओं से परेशान लोगों ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। भीषण गर्मी के बीच महिलाएं और पुरुष सुबह चार बजे से ही गैस सिलेंडर प्राप्त करने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि एजेंसी की अव्यवस्थित व्यवस्था और कथित मनमानी के चलते आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एजेंसी के बाहर घरेलू गैस सिलेंडरों की लंबी कतारें इस समस्या की गंभीरता को साफ तौर पर बयां कर रही हैं।

उपभोक्ताओं के अनुसार, कई दिनों से लोग सुबह 4 से 5 बजे के बीच लाइन में लग जाते हैं, लेकिन दिनभर इंतजार के बाद शाम तक उन्हें यह कहकर वापस कर दिया जाता है कि “गाड़ी आने वाली है”। लगातार कई दिनों तक ऐसा होने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

एक पीड़ित उपभोक्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति ₹2000 देकर गैस सिलेंडर लेने को तैयार हो जाए तो एजेंसी के कर्मचारी सिलेंडर सीधे उसके घर तक पहुंचा देते हैं, जबकि लाइन में घंटों खड़े रहने वाले लोगों को सिलेंडर नहीं मिलता। लोगों ने इस मामले में गैस सिलेंडरों की कथित ब्लैक मार्केटिंग की आशंका जताई है।

उपभोक्ताओं ने एजेंसी कर्मचारियों पर अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि गैस बुकिंग के बाद भी उन्हें डीएससी नंबर उपलब्ध नहीं कराया जाता और बीमा के नाम पर कथित रूप से ₹236 अतिरिक्त राशि काट ली जाती है, जबकि इसकी कोई ऑनलाइन रसीद या स्पष्ट विवरण भी नहीं दिया जाता।

लोगों का आरोप है कि एजेंसी से जुड़े कुछ लोग सीधे अंदर जाकर सिलेंडर प्राप्त कर लेते हैं, जबकि लाइन में लगे सामान्य उपभोक्ताओं को इंतजार के बाद भी निराशा ही हाथ लगती है।

एक अन्य उपभोक्ता ने बताया कि उन्होंने 18 तारीख को पर्ची कटवाई थी और लगातार तीन दिनों से सुबह लाइन में लग रहे हैं, लेकिन हर बार शाम तक उन्हें सिलेंडर नहीं दिया गया। पीड़ित ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर भी दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।

कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने एजेंसी कर्मचारियों से सवाल पूछे तो उन्हें कथित रूप से धमकियां भी दी गईं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

गौरतलब है कि एजेंसी की इस कथित लापरवाही और अव्यवस्था का असर केवल पुरुषों पर ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में महिलाओं पर भी पड़ रहा है, जिन्हें घर के जरूरी कार्यों के लिए गैस सिलेंडर की आवश्यकता होती है।

अब उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मामले की जांच कर एजेंसी की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष पड़ताल कराने की मांग की है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और यदि कोई अनियमितता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।

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Suyash Chitranshi
Suyash Chitranshi