सुलतानपुर। जिले की बहुप्रतीक्षित और वर्षों से निर्माणाधीन गुदरा घाट गोमती नदी सेतु परियोजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। लम्भुआ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सूरापुर-विजेथुआ-गुदरा-कोइरीपुर ग्रामीण मार्ग पर निर्माणाधीन गोमती नदी पुल के एक स्पान की बीम में दरार (क्रैक) आने की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है और जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, गुदरा घाट पर निर्माणाधीन इस दीर्घ सेतु की कुल लंबाई 196.88 मीटर है, जिसमें 6×30.80 मीटर स्पान व्यवस्था बनाई जा रही है। परियोजना में कुल छह स्पान प्रस्तावित हैं, जिनमें से पांच स्पान पर डेक स्लैब स्तर तक का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक प्रशांत कुमार सिंह के अनुसार, स्पान संख्या पी-3 और पी-4 के बीच अपस्ट्रीम बीम में प्री-स्ट्रेसिंग का कार्य किया जा रहा था। बीम में कुल पांच केविल (केबल) हैं, जिनमें से दो की प्री-स्ट्रेसिंग पहले ही पूरी हो चुकी थी। 11 जून को तीसरे केविल की प्री-स्ट्रेसिंग के दौरान प्रयुक्त जैक अचानक फेल हो गया, जिससे बीम पर निर्धारित सीमा से अधिक दबाव पड़ गया और उसमें दरार आ गई।
उन्होंने बताया कि संबंधित बीम के स्ट्रेस को रिलीज कर तकनीकी मानकों के अनुसार ज्वाइंट फिलर मैटेरियल से मरम्मत की जाएगी। साथ ही बीम की मजबूती और गुणवत्ता की जांच किसी स्वतंत्र थर्ड पार्टी एजेंसी से कराई जाएगी।
सेतु निगम ने स्पष्ट किया है कि यदि थर्ड पार्टी जांच में बीम निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरती है तो उसे पूरी तरह हटाकर नई बीम डाली जाएगी। विभाग का दावा है कि सुरक्षा और गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि बीम में आई दरार को छिपाने के लिए संबंधित हिस्से को कपड़ों और बोरों से ढक दिया गया था। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे परियोजना की पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल पिछले करीब साढ़े सात वर्षों से निर्माणाधीन है। वर्ष 2022 तक इसके पूर्ण होने की उम्मीद थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद पुल अब तक जनता के लिए शुरू नहीं हो सका है।
मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। क्षेत्रीय विधायक राजेश गौतम ने कहा है कि यदि निर्माण में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो वह इस विषय को मुख्यमंत्री स्तर तक उठाएंगे। उन्होंने पुल निर्माण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने मीडिया में प्रकाशित खबरों और शिकायतों का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच के लिए एडीएम (वित्त एवं राजस्व) के नेतृत्व में टीम गठित कर दी है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही, तकनीकी त्रुटि या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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