सुलतानपुर। जनपद में ग्रामीण विकास योजनाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने एक नई और अनोखी पहल की शुरुआत की है। अब जिले की सभी ग्राम पंचायतों में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुए विकास कार्यों का विस्तृत रिकॉर्ड “मॉनिटरिंग पीपीटी रिपोर्ट” के माध्यम से तैयार किया जाएगा। इस व्यवस्था के जरिए गांवों में हुए विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा और खर्च की गई सरकारी धनराशि का भी बारीकी से परीक्षण होगा।
प्रशासन की इस नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों को मिली धनराशि, उसके उपयोग, कराए गए विकास कार्यों और उनकी वर्तमान स्थिति का पूरा विवरण एक प्रस्तुति (पीपीटी) के रूप में तैयार किया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे ग्राम स्तर पर विकास योजनाओं की निगरानी और अधिक मजबूत होगी।
जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने जिला पंचायत राज अधिकारी अभिषेक शुक्ला को निर्देश दिए हैं कि जिले की सभी ग्राम पंचायतों से बीते पांच वर्षों का विस्तृत डेटा एकत्र किया जाए और उसे पीपीटी के माध्यम से व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया जाए। इसके बाद विकास भवन सभागार में ब्लॉकवार समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें पंचायत सचिव, खंड विकास अधिकारी, जिला विकास अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी शामिल होंगे।
इन समीक्षा बैठकों में ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों की गहन पड़ताल की जाएगी। विशेष रूप से यह देखा जाएगा कि गांवों में स्ट्रीट लाइट, हैंडपंप रीबोर, नालियों का निर्माण, इंटरलॉकिंग सड़कें, सामुदायिक शौचालय और अन्य योजनाओं पर कितना बजट खर्च किया गया तथा उसका लाभ वास्तव में ग्रामीणों तक पहुंचा या नहीं।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में कई ग्राम पंचायतों में स्ट्रीट लाइट, हैंडपंप मरम्मत और अन्य विकास कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में प्रशासन की यह नई पहल केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का काम करेगी।
डीएम इंद्रजीत सिंह की इस पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य सरकारी धनराशि के सही उपयोग को सुनिश्चित करना और विकास योजनाओं को अधिक जवाबदेह बनाना है। पीपीटी आधारित समीक्षा प्रणाली लागू होने के बाद प्रत्येक कार्य और खर्च का रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रहेगा, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इससे ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की गुणवत्ता बेहतर होगी, योजनाओं का लाभ सही पात्र लोगों तक पहुंचेगा और ग्रामीणों का सरकारी योजनाओं पर भरोसा भी मजबूत होगा।
ग्रामीण विकास से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि यह मॉडल प्रभावी तरीके से लागू हुआ तो यह अन्य जिलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। इससे गांवों में कराए जा रहे विकास कार्यों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी और पारदर्शिता के साथ जवाबदेही की व्यवस्था भी मजबूत होगी।
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