सुलतानपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज, सुलतानपुर से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कॉलेज प्राचार्य को स्टाफ नर्स द्वारा दिए गए प्रत्यावेदन पर निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि याचिकाकर्ता की शिकायत और प्रत्यावेदन पर दो माह के अंदर कारणयुक्त और स्पष्ट आदेश पारित किया जाए। यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की एकल पीठ द्वारा पारित किया गया।
मामला स्टाफ नर्स कीर्ति श्रीवास्तव से जुड़ा है, जिन्होंने अधिवक्ता अजय बहादुर यादव के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में रिट-ए संख्या 3705/2026 दाखिल की थी। याचिका में मांग की गई थी कि उन्हें स्टाफ नर्स के पद पर कार्य करने की अनुमति दी जाए और उनके कार्य में किसी प्रकार का उत्पीड़न या अवरोध उत्पन्न न किया जाए। इसके अलावा उनके द्वारा संबंधित अधिकारियों को दिए गए प्रत्यावेदन के निस्तारण की भी मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ने अपनी मांग को सीमित करते हुए कहा कि फिलहाल केवल 19 फरवरी 2026 को प्राचार्य, ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज, सुलतानपुर को दिए गए प्रत्यावेदन पर निर्णय आवश्यक है। उन्होंने न्यायालय को बताया कि शिकायत दर्ज किए जाने के बाद याचिकाकर्ता को नौकरी से हटा दिया गया, जिसके कारण उनके मामले पर प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लिया जाना जरूरी हो गया है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने भी प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने के लिए न्यायालय द्वारा निर्देश जारी किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्राचार्य, ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज, सुलतानपुर, याचिकाकर्ता के दिनांक 19 फरवरी 2026 के प्रत्यावेदन पर विचार करें और आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने की तिथि से दो माह के भीतर कारणयुक्त एवं स्पष्ट निर्णय पारित करें।
इस आदेश को मेडिकल कॉलेज प्रशासन और कर्मचारियों से जुड़े मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कॉलेज प्रशासन हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर क्या फैसला लेता है।
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