सुलतानपुर। उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के कादीपुर तहसील क्षेत्र में स्थित बिजेथुआ महावीरन (Bijethua Mahaviran Temple) धाम आस्था, पौराणिक मान्यताओं और चमत्कारों का अद्भुत संगम है। यह पवित्र स्थल न केवल जिले बल्कि पूरे पूर्वांचल और देशभर के श्रद्धालुओं के लिए गहरी श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से ही भक्तों के दुख-दर्द और संकट दूर हो जाते हैं।
कालनेमि वध से जुड़ा पौराणिक इतिहास
रामायण कालीन मान्यताओं के अनुसार, जब लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने निकले। रास्ते में प्यास लगने पर वे इसी स्थान पर स्थित कुंड के पास पहुंचे। यहां रावण द्वारा भेजे गए कालनेमि राक्षस ने साधु का वेश धारण कर उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन हनुमान जी ने उसकी माया को पहचान लिया और यहीं उसका वध कर दिया। इसी घटना के बाद यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाने लगा और यहां मंदिर की स्थापना हुई। पास स्थित कुंड ‘मकरी कुंड’ के नाम से प्रसिद्ध है, जहां स्नान कर ही श्रद्धालु हनुमान जी के दर्शन करते हैं।
मकरी कुंड और हत्याहरण कुंड की मान्यता
मंदिर परिसर में स्थित मकरी कुंड के साथ-साथ ‘हत्याहरण कुंड’ भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से व्यक्ति पापों से मुक्त हो जाता है और जीवन के संकट दूर हो जाते हैं। यह कुंड साल भर जल से भरा रहता है और श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा से यहां स्नान करते हैं।
मंगलवार और शनिवार को उमड़ती है भीड़
बिजेथुआ महावीरन धाम में हर मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इन दिनों यहां मेले जैसा दृश्य रहता है। सुल्तानपुर, जौनपुर, प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर, अयोध्या समेत आसपास के कई जिलों से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं। कई भक्त कड़ाही चढ़ाकर हलवा-पूड़ी का प्रसाद बनाते और वितरित करते हैं।
चमत्कारी प्रतिमा और रहस्यमयी मान्यता
मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर भी एक अनोखी मान्यता है। कहा जाता है कि उनकी प्रतिमा का एक पैर जमीन में काफी गहराई तक धंसा हुआ है। इसे जानने के लिए पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई भी कराई गई, लेकिन पैर का अंत नहीं मिल सका। इस रहस्य के कारण इस धाम को चमत्कारी माना जाता है।
चीन से आया ऐतिहासिक घंटा
इतिहास में उल्लेख मिलता है कि वर्ष 1889 में इस धाम की ख्याति सुनकर चीन से एक पीतल का विशाल घंटा यहां भेंट किया गया था, जो आज भी मंदिर की शोभा बढ़ा रहा है और श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
रामायण और ऐतिहासिक संदर्भ भी जुड़े
धार्मिक मान्यता के साथ-साथ इस धाम का उल्लेख रामचरितमानस के लंका कांड में भी मिलता है, जहां कालनेमि वध की कथा वर्णित है। वहीं इतिहासकारों के अनुसार यह स्थान सदियों से श्रद्धा का केंद्र रहा है और समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार भी कराया जाता रहा है।
पर्यटन और प्रशासनिक महत्व
यह धाम उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। पूर्व में राज्य सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी पहल की गई थी। स्थानीय स्तर पर इसे और विकसित करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
विशेष अवसरों पर होता है भव्य आयोजन
जेठ मंगल और अन्य पर्वों पर यहां विशेष पूजन, हवन और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जो कई दिनों तक चलता है। इस दौरान हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं और पूरे क्षेत्र में भक्ति का माहौल बन जाता है।
कैसे पहुंचे बिजेथुआ महावीरन धाम?
यह पवित्र धाम सुलतानपुर जिले के सूरापुर क्षेत्र में स्थित है, जो जौनपुर-सुलतानपुर सीमा के पास पड़ता है। सुलतानपुर मुख्यालय से इसकी दूरी लगभग 40 किलोमीटर है। यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। सूरापुर चौराहे से करीब 2 किलोमीटर की दूरी तय कर श्रद्धालु मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
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