लखनऊ। बख्शी का तालाब तहसील क्षेत्र के सुलतानपुर-राजापुर गांव के 104 किसानों को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से बड़ी राहत मिली है। किसानों के हक की लड़ाई लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शुक्ला ‘तिरंगा महाराज’ के प्रयासों से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) द्वारा यूपी राजस्व संहिता की धारा-38 के तहत की जा रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के आदेश पर बहादुरपुर सुलतानपुर के 104 किसानों को जमीन आवंटित की गई थी। लंबे समय से इन किसानों की भूमि को लेकर विवाद चल रहा था, जिसके खिलाफ किसान लगातार संघर्ष कर रहे थे। किसानों के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शुक्ला ‘तिरंगा महाराज’ लगातार आंदोलन और कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
हाईकोर्ट ने माना किसानों का पक्ष मजबूत
मामला कोर्ट नंबर-8 में रिट-सी संख्या 7280/2024 “शीतला प्रसाद एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य” के रूप में सुना गया। न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि संबंधित गांव में अभी चकबंदी प्रक्रिया जारी है और यूपी सीएच अधिनियम 1953 की धारा-52 के तहत अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं विनीत कुमार पांडे, धर्मेंद्र सिंह और प्रदीप कुमार तिवारी ने अदालत में दलील दी कि जब गांव चकबंदी प्रक्रिया के अधीन है, तब एसडीएम द्वारा यूपी राजस्व संहिता 2006 की धारा-38 के तहत कार्रवाई करना अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
राज्य सरकार की ओर से पेश स्थायी अधिवक्ता ने भी इस तथ्य का विरोध नहीं किया कि गांव में अभी चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद अदालत ने मामले में याचिकाकर्ताओं की दलीलों को प्रथम दृष्टया मजबूत मानते हुए अगली सुनवाई तक धारा-38 के तहत चल रही पूरी कार्रवाई पर रोक लगा दी।
“न्यायपालिका पर था पूरा भरोसा” : तिरंगा महाराज
उच्च न्यायालय के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए किसानों के पैरोकार दीपक शुक्ला ‘तिरंगा महाराज’ ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। उन्होंने कहा कि अदालत के इस फैसले से किसानों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत हुआ है।
तिरंगा महाराज ने कहा, “मैं शोषित, पीड़ित, वंचित और गरीब किसानों की आवाज बनकर हमेशा उनके साथ खड़ा रहूंगा। किसानों की जमीन बचाने की यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।”
किसानों के लिए सड़क से अदालत तक लड़ी लड़ाई
दीपक शुक्ला ‘तिरंगा महाराज’ लंबे समय से किसानों के अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। किसानों की जमीन बचाने के लिए उन्होंने कई आंदोलन और धरना-प्रदर्शन किए। आंदोलन के दौरान बख्शी का तालाब तहसील में तालाबंदी तक की गई थी।
इतना ही नहीं, आंदोलन के दौरान उन पर हमला भी हुआ और गोमती नदी आंदोलन के समय इटौंजा थाना पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया था। बावजूद इसके उन्होंने किसानों का साथ नहीं छोड़ा और लगातार संघर्ष करते रहे।
स्थानीय लोगों ने बताया “जन-जन की आवाज”
स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि तिरंगा महाराज गरीबों और वंचितों की मजबूत आवाज बन चुके हैं। किसानों ने कहा कि उनके संघर्ष का ही परिणाम है कि आज हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिली है। किसानों को अब उम्मीद है कि उनकी आवंटित जमीन सुरक्षित रहेगी और उन्हें न्याय मिलेगा।
ग्रामीणों ने कहा कि बिना किसी बड़े संसाधन के केवल जनसमर्थन के दम पर तिरंगा महाराज लगातार गरीबों और किसानों की लड़ाई लड़ रहे हैं, जिससे क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
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