सुलतानपुर। जनपद के पंडित राम नरेश त्रिपाठी सभागार में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर जनकल्याण फाउंडेशन द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम में शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. उमा शंकर पाल उपस्थित रहे, जबकि राजकरन पाल, अखिलेश पाल एवं सीताराम पाल विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, शिक्षकों और समाजसेवियों ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि प्रो. उमा शंकर पाल ने अपने संबोधन में कहा कि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का सम्मान केवल पुरस्कार देना नहीं बल्कि उनके मनोबल और आत्मविश्वास को नई उड़ान देना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को आगे बढ़ने, समाज के प्रति जिम्मेदार बनने और देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं। प्रो. पाल ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने जनकल्याण, धर्म और संस्कृति के संरक्षण में ऐतिहासिक कार्य किए। काशी सहित देश के अनेक मंदिरों, घाटों और धार्मिक स्थलों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
जनकल्याण फाउंडेशन के अध्यक्ष श्याम बहादुर पाल ने बताया कि उनकी संस्था एक गैर-राजनीतिक सामाजिक संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा को बढ़ावा देना और प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि इस सम्मान समारोह में सुलतानपुर जिले के कक्षा 10वीं और 12वीं के लगभग 50 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।
उन्होंने कहा कि खराब मौसम और बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अभिभावकों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है। यह सकारात्मक बदलाव भविष्य में जिले और समाज के विकास का आधार बनेगा।
अपने संबोधन में श्याम बहादुर पाल ने शिक्षा के महत्व पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की प्रगति का सबसे मजबूत आधार शिक्षा ही होती है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित नहीं होगा, तब तक वास्तविक विकास और सामाजिक समानता की कल्पना अधूरी रहेगी।
उन्होंने संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रेरणादायक विचारों को याद करते हुए कहा, “शिक्षा उस शेरनी का दूध है, जो पिएगा वह निश्चित ही दहाड़ेगा।” उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने और जीवन में निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान श्याम बहादुर पाल ने देश में समान शिक्षा व्यवस्था लागू किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सभी वर्गों के बच्चों को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए ‘वन नेशन, वन एजुकेशन’ की अवधारणा को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। इससे शिक्षा के क्षेत्र में समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलेगा।
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