सुलतानपुर। लखीमपुर खीरी जिले के मैगलगंज क्षेत्र में सोमवार देर रात हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने सुलतानपुर के एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। हरिद्वार से लौट रहे सुलतानपुर निवासी सिंचाई विभाग के लिपिक विमल सिंह पटेल (50), उनकी पत्नी वंदना पटेल (45) और भांजी अलिख्या वर्मा (22) की हादसे में मौत हो गई, जबकि उनके दो बच्चे भूमि पटेल और वीर पटेल गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना की सूचना जैसे ही सुलतानपुर के शास्त्रीनगर मोहल्ले में पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के घर पर संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लग गया और हर किसी की आंखें नम दिखाई दीं।
जानकारी के अनुसार, विमल सिंह पटेल सिंचाई विभाग के खंड-16 में लिपिक के पद पर कार्यरत थे। वह 13 जून को अपने परिवार के साथ धार्मिक एवं पर्यटन यात्रा पर हरिद्वार गए थे। सोमवार को परिवार कार से सुलतानपुर वापस लौट रहा था। बताया जा रहा है कि देर रात हरदोई जिले के जहानीखेड़ा क्षेत्र के पास उनकी कार अनियंत्रित हो गई और आगे चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉली में पीछे से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार ट्रॉली में बुरी तरह फंस गई।
स्थानीय पुलिस के अनुसार दुर्घटना के बाद भी ट्रैक्टर चालक को कार फंसे होने का अंदाजा नहीं हुआ और वह वाहन को आगे बढ़ाता रहा। कार ट्रॉली में फंसी हुई लगभग दो किलोमीटर तक घिसटती रही। चपरतला क्षेत्र के पास राहगीरों और स्थानीय लोगों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को रुकवाया। जब लोगों ने ट्रॉली के पीछे फंसी कार को देखा तो मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद ट्रैक्टर चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया।
हादसे में विमल सिंह पटेल, उनकी पत्नी वंदना और भांजी अलिख्या वर्मा की मौत हो गई। वहीं कार में मौजूद भूमि पटेल और वीर पटेल गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलने पर मैगलगंज पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल भिजवाया। मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
हादसे की खबर मिलते ही सुलतानपुर के शास्त्रीनगर मोहल्ले में मातम छा गया। पड़ोसी, रिश्तेदार और परिचित बड़ी संख्या में परिवार के घर पहुंचने लगे। हर कोई इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध दिखाई दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार विमल सिंह पटेल बेहद मिलनसार और सामाजिक स्वभाव के व्यक्ति थे। उनकी असामयिक मृत्यु से मोहल्ले में शोक का माहौल है। विमल सिंह पटेल सिंचाई विभाग में लिपिक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। बताया जाता है कि उनके पिता सियाराम वर्मा सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर रहे थे, जिनका पहले ही निधन हो चुका है।
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