सुलतानपुर। जिले के धनपतगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में तैनात एक चिकित्साधिकारी की कथित जातिगत टिप्पणी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किए जाने के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व जिला मंत्री एवं राष्ट्रीय परशुराम परिषद के जिला अध्यक्ष बलराम मिश्र ने इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर संबंधित चिकित्साधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, धनपतगंज सीएचसी में तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. पीएल गुप्ता (प्यारेलाल गुप्ता) पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से एक ऐसी पोस्ट साझा की, जिसे ब्राह्मण समाज के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ माना जा रहा है। आरोप है कि इस पोस्ट से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हुआ है और समाज के एक वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं।
बताया जा रहा है कि यह पोस्ट ‘Med Group PM Duty’ नामक व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा की गई थी। इस ग्रुप में जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) समेत स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी जुड़े हुए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि साझा किए गए संदेश में ब्राह्मण समाज के प्रति आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया था। साथ ही भाजपा को लेकर भी जातिगत टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
राष्ट्रीय परशुराम परिषद के जिला अध्यक्ष बलराम मिश्र ने उप मुख्यमंत्री को भेजे अपने शिकायत पत्र में कहा है कि किसी सरकारी कर्मचारी, विशेष रूप से चिकित्सक से समाज में सद्भाव और निष्पक्षता बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. गुप्ता का यह आचरण सरकारी सेवा की मर्यादाओं के विपरीत है तथा यह उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक नियमावली 1956 की भावना का उल्लंघन प्रतीत होता है।
उन्होंने पत्र में मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, वायरल पोस्ट की सत्यता की पुष्टि की जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित चिकित्साधिकारी के खिलाफ विधिसम्मत एवं कठोर कार्रवाई की जाए।
शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित चिकित्साधिकारी अस्पताल में मरीजों को दवा लिखते समय जातिगत आधार पर भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराकर तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है।
विवाद बढ़ने के बाद चिकित्साधिकारी डॉ. पीएल गुप्ता ने भी अपना पक्ष सामने रखा है। उन्होंने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संबंधित संदेश किसी अन्य स्रोत से आया था और वह अनजाने में उनके द्वारा फॉरवर्ड हो गया था। डॉ. गुप्ता का कहना है कि जैसे ही उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ, उन्होंने तत्काल वह संदेश डिलीट कर दिया और ग्रुप में माफी भी मांग ली थी। उन्होंने कहा कि उनका किसी भी समाज, जाति या समुदाय की भावनाओं को आहत करने का कोई उद्देश्य नहीं था और मामले को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है।
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