सुलतानपुर। कलेक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार में शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत शिक्षक कैशलेस मेडिकल सुविधा का औपचारिक शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने 20 शिक्षकों को प्रतीकात्मक रूप से कैशलेस मेडिकल कार्ड वितरित कर योजना का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर राज्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। शिक्षक समाज का भविष्य तैयार करते हैं, इसलिए उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रितों को बेहतर एवं समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
कार्यक्रम का आयोजन सुलतानपुर कलेक्ट्रेट के नवीन सभागार में किया गया, जहां बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षा विभाग के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने की। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी, जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह, मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी उपेंद्र गुप्ता सहित जिले के कई प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षक कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान वाराणसी से मुख्यमंत्री के संबोधन का एलईडी स्क्रीन के माध्यम से सीधा प्रसारण भी सभी उपस्थित लोगों ने देखा।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने 20 चयनित शिक्षकों को प्रतीकात्मक रूप से कैशलेस मेडिकल कार्ड वितरित किए। यह कार्ड योजना के तहत मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं का प्रतीक हैं।
राज्यमंत्री ने कहा कि यह पहल शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि योजना लागू होने के बाद शिक्षकों को इलाज के दौरान आर्थिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और उन्हें समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।
अपने संबोधन में राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने इस योजना के प्रभावी संचालन के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 10 लाख शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और उनके आश्रित इस योजना का लाभ प्राप्त करेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक कर्मचारी को बिना आर्थिक चिंता के बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
राज्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में संचालित विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) व्यवस्था के माध्यम से विद्यार्थियों के अभिभावकों के बैंक खातों में यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग और स्टेशनरी के लिए प्रति छात्र 1200 रुपये सीधे भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ी है और विद्यार्थियों को समय पर आवश्यक सामग्री उपलब्ध हो रही है। इसके साथ ही प्रदेश के विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
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