सुलतानपुर। जिले के कादीपुर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, झारखंड में बुधवार को आयोजित प्रातःकालीन वंदना सभा एक विशेष और प्रेरणादायी अवसर की साक्षी बनी। विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य एवं वरिष्ठ शिक्षाविद् श्री प्रदीप कुमार त्रिपाठी के आगमन पर पूरे विद्यालय परिवार ने उनका आत्मीय और गरिमामय स्वागत किया। इस दौरान विद्यालय परिसर में उत्साह और सम्मान का वातावरण देखने को मिला।
विद्यालय के वर्तमान प्रधानाचार्य श्री अवधेश कुमार मिश्रा सहित समस्त शिक्षकगण और विद्यार्थियों ने पूर्व प्रधानाचार्य का अभिनंदन किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन, संस्कार और जीवन मूल्यों से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश भी प्राप्त हुए, जिसने वंदना सभा को एक प्रेरक आयोजन का स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री अवधेश कुमार मिश्रा ने कहा कि आदरणीय श्री प्रदीप कुमार त्रिपाठी न केवल उनके गुरु हैं, बल्कि इस विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री त्रिपाठी के स्थानांतरण के बाद उन्हें विद्यालय का प्रधानाचार्य बनने का अवसर मिला, जिसे वह अपना सौभाग्य मानते हैं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गुरु का मार्गदर्शन जीवन और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में अमूल्य होता है। आज उनके बीच अपने गुरु की उपस्थिति पूरे विद्यालय परिवार के लिए प्रेरणा और गर्व का विषय है। उनके अनुभव और व्यक्तित्व से नई पीढ़ी को सीखने का अवसर मिल रहा है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानाचार्य श्री अवधेश कुमार मिश्रा ने विद्यालय परिवार की ओर से श्री प्रदीप कुमार त्रिपाठी को अंगवस्त्र एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। इस सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित शिक्षकगण और विद्यार्थियों ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उनका अभिनंदन किया। विद्यालय परिवार का यह सम्मान इस बात का प्रतीक रहा कि शिक्षा संस्थानों में पूर्व शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के योगदान को सदैव आदर और सम्मान के साथ याद किया जाता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सामने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को भी जीवंत करते हैं।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में वरिष्ठ शिक्षाविद् श्री प्रदीप कुमार त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए कई महत्वपूर्ण बातें बताईं। उन्होंने कहा कि अनुशासन, संस्कार, परिश्रम और समय का सदुपयोग किसी भी विद्यार्थी की सफलता की सबसे मजबूत नींव होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर अध्ययन करने, अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प बनाए रखने और श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक अच्छा नागरिक और श्रेष्ठ व्यक्तित्व बनना भी उतना ही आवश्यक है।
अपने संबोधन में श्री त्रिपाठी ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होता, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण पाठशाला भी है। यहां प्राप्त होने वाले संस्कार जीवनभर व्यक्ति का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने माता-पिता, गुरुजनों और समाज के प्रति सम्मान की भावना बनाए रखने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि अनुशासन, ईमानदारी और सकारात्मक दृष्टिकोण भी सफलता के लिए आवश्यक हैं। यदि विद्यार्थी इन मूल्यों को अपनाते हैं तो वे जीवन के हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
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