सुलतानपुर। जनपद की अमहट मंडी में चल रहे मंडी लाइसेंस नवीनीकरण अभियान को लेकर व्यापारियों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। व्यापारियों ने मंडी प्रशासन पर लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया में अनियमितताओं, अतिरिक्त शुल्क वसूली और अनावश्यक दस्तावेजों की मांग करने का आरोप लगाया है। इस मुद्दे को लेकर व्यापारियों में नाराजगी देखी जा रही है और उन्होंने उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है।
व्यापारियों का आरोप है कि मंडी अधिकारियों द्वारा लाइसेंस नवीनीकरण के दौरान उन गारंटीदारों के लाइसेंस की फोटोकॉपी और हस्ताक्षर अनिवार्य रूप से मांगे जा रहे हैं, जिन्हें वर्षों पहले लाइसेंस बनवाने के समय गारंटर बनाया गया था।
व्यापारियों का कहना है कि मंडी परिषद या मंडी निदेशक स्तर से इस संबंध में कोई नया आदेश या शासनादेश जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर अधिकारियों द्वारा इस शर्त को लागू किया जा रहा है, जिससे व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मामले को लेकर सबसे गंभीर आरोप लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क को लेकर सामने आया है। व्यापारियों का दावा है कि मंडी लाइसेंस नवीनीकरण की निर्धारित सरकारी फीस लगभग 251 रुपये है, लेकिन कई व्यापारियों से 500 रुपये या उससे अधिक की राशि ली जा रही है।
व्यापारियों का आरोप है कि यदि यह शुल्क निर्धारित नियमों के विपरीत वसूला जा रहा है तो इसकी जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि पारदर्शिता की कमी के कारण व्यापारी असमंजस और आर्थिक बोझ का सामना कर रहे हैं।
अमहट मंडी के व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि 30 जून 2026 तक सभी पात्र व्यापारियों के लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक या व्यावसायिक समस्या उत्पन्न न हो। व्यापारियों का कहना है कि नवीनीकरण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए तथा केवल उन्हीं दस्तावेजों की मांग की जाए जिनका स्पष्ट प्रावधान नियमावली में मौजूद हो।
व्यापारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एंटी-करप्शन टीम से भी हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि 30 जून तक समय-समय पर मंडी परिसर में निरीक्षण और छापेमारी की जाए ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता, अतिरिक्त वसूली या भ्रष्टाचार की शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो सके।व्यापारियों का मानना है कि यदि स्वतंत्र जांच कराई जाती है तो वास्तविक स्थिति सामने आएगी और मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।
मंडी के कई व्यापारियों का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट शासनादेश या उच्चाधिकारियों के निर्देश के अतिरिक्त शर्तें थोपना और निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और व्यापारियों को राहत प्रदान की जाए।
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