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RSS और सरकार पर बरसे पूर्व मंत्री मोईद अहमद, पेपर लीक से लेकर कोचिंग हादसों तक उठाए कई सवाल

सुलतानपुर। पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोईद अहमद ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पेपर लीक मामलों, नई शिक्षा नीति, लखनऊ कोचिंग सेंटर हादसे और आरएसएस की वित्तीय पारदर्शिता जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। अहमद ने कहा कि देश के युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ हो रहा है और सरकार इन गंभीर समस्याओं पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल साबित हुई है।

सुलतानपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान मोईद अहमद ने कहा कि बेरोजगारी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की खामियों से देश का युवा वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याओं के समाधान के बजाय वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस पार्टी और उसके छात्र संगठनों द्वारा इन मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया जा रहा है।

पूर्व मंत्री मोईद अहमद ने कर्नाटक के गृह मंत्री द्वारा आरएसएस को लेकर लिखी गई चिट्ठी का समर्थन करते हुए कहा कि देश में संचालित प्रत्येक संस्था, संगठन और ट्रस्ट का विधिवत पंजीकरण होता है तथा उसे अपने आय-व्यय और वित्तीय लेनदेन का पूरा विवरण देना पड़ता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं आरएसएस को देश का सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) बता चुके हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि इतने बड़े संगठन का पंजीकरण क्यों नहीं है और उसके पास आने वाले चंदे तथा आर्थिक संसाधनों का सार्वजनिक लेखा-जोखा क्यों उपलब्ध नहीं है।

मोईद अहमद ने आरोप लगाया कि यह विषय केवल राजनीतिक नहीं बल्कि वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े संगठन को कानून के दायरे में रहकर अपने वित्तीय स्रोतों और खर्चों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

कांग्रेस नेता ने आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि संगठन अपने ऊपर उठने वाले सवालों से बचने के लिए हिंदू धर्म की आड़ लेता है। उन्होंने कहा कि हिंदू केवल किसी एक संगठन की पहचान नहीं है, बल्कि इस देश का प्रत्येक नागरिक राष्ट्रहित और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन की आलोचना को धर्म विरोधी बताना उचित नहीं है। लोकतंत्र में प्रत्येक संस्था और संगठन से सवाल पूछना जनता का अधिकार है।

देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर प्रतिक्रिया देते हुए मोईद अहमद ने कहा कि इससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा देते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी उम्मीदों को तोड़ देती हैं।

उन्होंने इस मुद्दे पर यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि कांग्रेस के छात्र और युवा संगठन लगातार सड़क पर उतरकर युवाओं की आवाज बुलंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी इस मुद्दे पर युवाओं के संघर्ष का समर्थन कर रहे हैं।

मोईद अहमद ने नई शिक्षा नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें बेरोजगारी की ओर धकेल रही है। उनके अनुसार नई शिक्षा नीति का ढांचा ऐसा है, जिससे युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगार योग्य बनाना होना चाहिए, लेकिन वर्तमान नीतियों के कारण छात्रों और अभिभावकों में असंतोष बढ़ रहा है।

दिल्ली के बाद लखनऊ में सामने आए कोचिंग सेंटर से जुड़े हादसों और छात्र-छात्राओं की मौतों पर मोईद अहमद ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी की कमी को दर्शाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों की जांच और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई होतीं, तो ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकता था। अहमद ने कहा कि सरकार और प्रशासन को छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए थी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी इन हादसों के खिलाफ अपना विरोध पहले ही दर्ज करा चुकी है और आगे भी पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ता आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और कैंडल मार्च के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी पीछे हटने वाली नहीं है। पार्टी लगातार पीड़ितों के हक की लड़ाई लड़ती रहेगी और सरकार से जवाबदेही की मांग करती रहेगी।

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Suyash Chitranshi
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