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सुलतानपुर में कोचिंग संस्थानों पर प्रशासन सख्त, 196 कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था की होगी व्यापक जांच

सुलतानपुर। लखनऊ के कोचिंग संस्थान में हुए हादसे से सबक लेते हुए सुलतानपुर प्रशासन ने जिले के सभी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच शुरू कर दी है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने जनपद में संचालित सभी कोचिंग सेंटरों का स्थलीय निरीक्षण कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत सुरक्षा मानकों की समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी संस्थान में छात्रों की जान जोखिम में न पड़े।

इसी क्रम में मंगलवार को जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह और पुलिस अधीक्षक चारू निगम ने संयुक्त रूप से सिविल लाइन स्थित मेहमान होटल के निकट संचालित कोहिनूर इंडिया कोचिंग सेंटर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने फायर सेफ्टी व्यवस्था, भवन की संरचना, आपातकालीन निकास मार्ग, विद्युत सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। प्रशासन की इस पहल को जिले के विद्यार्थियों और अभिभावकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि सुलतानपुर जनपद में लगभग 196 कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। इन सभी संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जांच कराई जाएगी। इसके लिए प्रशासन द्वारा तीन अलग-अलग जांच टीमों का गठन किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में जाकर कोचिंग संस्थानों का भौतिक सत्यापन करेंगी और अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगी।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में कोचिंग संस्थानों में आग लगने, भवन दुर्घटनाओं और अन्य सुरक्षा संबंधी घटनाओं ने गंभीर चिंता पैदा की है। ऐसे में किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए समय रहते सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, उनकी कार्यशील स्थिति, आपातकालीन निकास मार्ग, भवन की मजबूती तथा सुरक्षा से जुड़े अन्य पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यदि किसी कोचिंग संस्थान में पर्याप्त फायर सेफ्टी उपकरण नहीं पाए जाते हैं या आपातकालीन निकास व्यवस्था मानकों के अनुरूप नहीं है, तो संबंधित संचालकों को आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए जाएंगे।

प्रशासन का मानना है कि किसी भी आपात स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए इमरजेंसी एग्जिट और फायर सेफ्टी सिस्टम का सही होना अत्यंत आवश्यक है। यही कारण है कि इस अभियान में सुरक्षा संबंधी प्रत्येक बिंदु की गंभीरता से समीक्षा की जा रही है।

जिलाधिकारी ने बताया कि विद्युत विभाग को भी इस अभियान में शामिल किया गया है। जिन कोचिंग संस्थानों में एयर कंडीशनर, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है, वहां स्वीकृत विद्युत भार (लोड) की जांच की जाएगी।

यदि किसी संस्थान में निर्धारित क्षमता से अधिक विद्युत भार का उपयोग पाया जाता है तो उसे चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि अधिक विद्युत भार और खराब वायरिंग कई बार आग लगने जैसी घटनाओं का कारण बन सकती है, इसलिए इस पहलू को भी गंभीरता से लिया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने भवनों में की जाने वाली सजावट को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई भवन स्वामी और संस्थान संचालक आकर्षक इंटीरियर के लिए लकड़ी अथवा अन्य ज्वलनशील सामग्री की पैनलिंग कराते हैं। आग लगने की स्थिति में ऐसी सामग्री आग को तेजी से फैलाने का काम करती है और बचाव कार्य को भी कठिन बना देती है। इसी कारण जांच टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे सभी स्थानों की विशेष रूप से जांच करें और आवश्यकता पड़ने पर सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी करें।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों से जुड़ी कमियां पाई जाएंगी, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधार करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बावजूद यदि संचालक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य संस्थानों को बंद करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित बनाना है ताकि छात्र निश्चिंत होकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। प्रशासन की इस कार्रवाई को जनपदवासियों ने सकारात्मक कदम बताया है।

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Suyash Chitranshi
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