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कटका खानपुर में श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा समुद्र मंथन का प्रसंग, भगवान कृष्ण की झांकी देख भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

सुलतानपुर। जिले के गोसाईगंज थाना क्षेत्र स्थित कटका खानपुर कस्बे में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत संगीतमयी कथा के चौथे दिन भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। गुरुवार देर रात तक चले कथा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान की भक्ति में सराबोर नजर आए। कथा व्यास के रूप में अयोध्या धाम से पधारे आचार्य विष्णु शास्त्री ने समुद्र मंथन, देवताओं के अमृतपान और भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार की दिव्य कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समुद्र मंथन की कथा सुन भावुक हुए श्रद्धालु

आचार्य विष्णु शास्त्री ने कथा के दौरान बताया कि महर्षि दुर्वासा के श्राप के कारण देवताओं का तेज, वैभव और शक्ति समाप्त हो गई थी। जब देवता संकट में पड़ गए तो उन्होंने भगवान विष्णु की शरण ली। भगवान श्रीहरि ने उन्हें असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने का मार्ग बताया, जिससे अमृत प्राप्त हो सके और देवताओं का खोया हुआ वैभव वापस लौट सके।

उन्होंने विस्तार से बताया कि समुद्र मंथन के लिए मंदराचल पर्वत को मथनी और नागराज वासुकी को रस्सी बनाया गया। जब पर्वत समुद्र में डूबने लगा तो भगवान विष्णु ने कूर्म (कच्छप) अवतार धारण कर उसे अपनी पीठ पर संभाला। समुद्र मंथन से एक-एक कर चौदह दिव्य रत्न प्रकट हुए, जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व आज भी वर्णित किया जाता है।

मोहिनी अवतार का प्रसंग सुनाया

कथा व्यास ने बताया कि अमृत कलश प्राप्त होने के बाद देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष छिड़ गया। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर अपनी दिव्य लीला से असुरों को मोहित कर दिया और देवताओं को अमृत पान कराया। अमृत ग्रहण करने के बाद देवताओं ने पुनः अपनी शक्ति और वैभव प्राप्त किया।

इस प्रसंग का वर्णन सुनकर कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए और भगवान विष्णु की महिमा का गुणगान करने लगे।

श्रीराम और श्रीकृष्ण जन्म की कथा ने बांधा समां

समुद्र मंथन के साथ-साथ आचार्य विष्णु शास्त्री ने वामन अवतार, भगवान श्रीराम के जन्म और भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण से जुड़े प्रसंगों का भी विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण पूर्ण ब्रह्म के अवतार हैं, जिनकी भक्ति से मनुष्य के जीवन के सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं।

उन्होंने श्रद्धालुओं को भागवत पारायण का संकल्प दिलाते हुए धर्म, सत्य और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

भगवान श्रीकृष्ण की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

कथा समाप्ति के बाद भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक एवं मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई। झांकी में बाल गोपाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। पूरे परिसर में “जय श्रीकृष्ण” और “राधे-राधे” के जयघोष गूंजते रहे।

यजमान दंपति ने की व्यास पीठ की आरती

कार्यक्रम के समापन पर मुख्य यजमान जितेंद्र सिंह उर्फ कल्लू ने अपनी पत्नी के साथ व्यास पीठ की विधिवत आरती उतारी और कथा की सफलता के लिए भगवान से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया।

इस अवसर पर मनोज सिंह, ननकऊ सिंह, वीर विक्रम सिंह, हिमांशु सिंह, प्रियांशु सिंह, विवेक सिंह, अभय सिंह, रेनू सिंह सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु, धर्मप्रेमी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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Suyash Chitranshi
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