सुलतानपुर। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बुधवार शाम सुलतानपुर कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण और मंदिर ट्रस्ट से जुड़े भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री के हालिया बयान को लेकर कई सवाल उठाए। संजय सिंह ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति मंदिर निर्माण में कथित अनियमितताओं या भ्रष्टाचार पर सवाल उठाता है तो क्या उसे राम विरोधी या राम भक्तों का विरोधी मान लिया जाएगा।
सांसद संजय सिंह का यह बयान उस समय आया है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा था कि वही लोग आज सवाल उठा रहे हैं जिन्होंने अतीत में राम भक्तों पर गोली चलवाई थी। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे को धार्मिक भावनाओं से जोड़ना उचित नहीं है और इससे वास्तविक सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।
प्रेस वार्ता के दौरान संजय सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब देने के बजाय विपक्ष पर राजनीतिक हमला किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मंदिर निर्माण में पारदर्शिता की मांग करना या भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना राम विरोधी होना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी सार्वजनिक परियोजना में खर्च होने वाले धन और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है। संजय सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री को आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने पूरे मुद्दे को धार्मिक और राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया।
AAP सांसद ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि राम मंदिर आंदोलन और मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने भी समय-समय पर मंदिर निर्माण, चढ़ावे और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राम भक्तों पर गोली चलवाने के समय नृपेन्द्र मिश्रा का नाम चर्चाओं में रहा था और आज भाजपा ने उन्हें राम मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया हुआ है।
इसके साथ ही उन्होंने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ता महिपाल सिंह, मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेता विनय कटियार, महंत धर्मदास, इंजीनियर दीनानाथ वर्मा तथा राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास का भी उल्लेख किया। संजय सिंह ने कहा कि इन सभी लोगों ने भी अलग-अलग अवसरों पर मंदिर निर्माण, चढ़ावे और निर्माण कार्यों में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि यदि भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना राम विरोधी होना है, तो क्या इन सभी लोगों को भी उसी श्रेणी में रखा जाएगा।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने बयान के माध्यम से वास्तविक मुद्दे से ध्यान हटाने और कथित भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि मंदिर निर्माण में खर्च हुए धन का उपयोग किस प्रकार किया गया और यदि किसी स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि श्रीराम मंदिर निर्माण कार्य में लगभग 40 प्रतिशत तक भ्रष्टाचार हुआ है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने प्रेस वार्ता के दौरान कोई नया दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया। भाजपा और राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग अवसरों पर पहले भी इनकार किया जाता रहा है।
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