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सपा का भाजपा सरकार पर बड़ा हमला: पीडीए वर्ग का हक छीना जा रहा, आरक्षण में हुई बड़ी लूट

सुलतानपुर। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था की अनदेखी करने और पिछड़ा, दलित एवं अल्पसंख्यक (पीडीए) वर्ग के अधिकारों का हनन करने का गंभीर आरोप लगाया है। सोमवार को सुपर मार्केट स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी नेताओं ने दावा किया कि वर्ष 2019 से 2026 के बीच हुई विभिन्न सरकारी भर्तियों में आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिसके चलते पीडीए वर्ग के युवाओं को हजारों पदों से वंचित होना पड़ा।

सपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश में भर्ती प्रक्रियाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और आरक्षण नियमों के कथित उल्लंघन ने युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सपा जिलाध्यक्ष रघुवीर यादव और महासचिव सलाहुद्दीन अहमद ने आरोप लगाया कि विभिन्न विभागों की भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण व्यवस्था की अनदेखी किए जाने से कुल 11,514 से अधिक पद प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि 69 हजार शिक्षक भर्ती, लेखपाल भर्ती, कृषि प्राविधिक सहायक भर्ती, प्राविधिक शिक्षक भर्ती तथा एडेड जूनियर हाईस्कूल भर्ती जैसी चयन प्रक्रियाओं में आरक्षित वर्ग को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। नेताओं ने दावा किया कि इन भर्तियों में पीडीए वर्ग के युवाओं के साथ न्याय नहीं हुआ और उनके संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी की गई।

सपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद लगातार सामने आते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है।

पार्टी नेताओं ने कहा कि नीट, दरोगा भर्ती और अन्य परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने युवाओं के मन में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मांग की कि भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जाए ताकि युवाओं का विश्वास बहाल हो सके।

प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक अरुण वर्मा और वरिष्ठ सपा नेता शकील अहमद ने सरकार की आउटसोर्सिंग नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्थायी सरकारी नौकरियों को कम कर आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियां बढ़ा रही है, जहां आरक्षण व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाती।

नेताओं का कहना था कि इस व्यवस्था से पिछड़े, दलित और वंचित वर्ग के युवाओं को रोजगार के अवसरों में अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सुलतानपुर मेडिकल कॉलेज समेत विभिन्न संस्थानों में हुई आउटसोर्सिंग आधारित भर्तियों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

समाजवादी पार्टी नेताओं ने कहा कि पार्टी का लीगल सेल इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। साथ ही पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर चौपालों और जनसभाओं के माध्यम से लोगों को आरक्षण और भर्ती से जुड़े मुद्दों की जानकारी देंगे।

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पीडीए वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी। नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार चुनाव के समय पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज की बात करती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनके हितों की अनदेखी करती है।

वरिष्ठ सपा नेताओं ने दावा किया कि बेरोजगारी, भर्ती घोटालों, आउटसोर्सिंग और आरक्षण से जुड़े मुद्दे आगामी 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रमुख राजनीतिक विषय बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं और वंचित वर्गों के बीच इन मुद्दों को लेकर व्यापक असंतोष है, जिसे पार्टी जनता के बीच लेकर जाएगी।

सपा नेताओं का कहना था कि यदि आरक्षण व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता और संवैधानिक भावना के अनुरूप लागू नहीं किया गया, तो सामाजिक न्याय की अवधारणा कमजोर होगी और इसका प्रभाव प्रदेश के लाखों युवाओं पर पड़ेगा।

प्रेस वार्ता में जिलाध्यक्ष रघुवीर यादव, महासचिव सलाहुद्दीन, पूर्व विधायक अरुण वर्मा, पूर्व विधायक अनूप सांडा, वरिष्ठ सपा नेता शकील अहमद, प्रदेश सचिव पिछड़ा वर्ग विजय यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष पृथ्वीपाल यादव, जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र मौर्य, अशोक वर्मा, राजनारायण यादव, कसीर अहमद एडवोकेट, ओ.पी. वर्मा, बब्बन यादव, विनीत तिवारी, विनोद जायसवाल सहित बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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Suyash Chitranshi
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