सुलतानपुर के ऐनपुर गांव में सरकारी भूमि पर कथित कब्जे को लेकर पिछले एक वर्ष से जारी संघर्ष, 18 IGRS, 22 RTI, 28 स्पीड पोस्ट, दर्जनों ई-मेल और कई विभागीय शिकायतों के बावजूद कार्रवाई पर सवाल; शिकायतकर्ताओं ने निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई।
सुलतानपुर। जिले के ग्राम ऐनपुर (तहसील सदर, पूर्व बल्दीराय) में स्थित सरकारी पीसीएफ गोदाम, बंजर एवं सार्वजनिक भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब केवल भूमि विवाद नहीं रह गया है। शिकायतकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों, न्यायालयीन आदेशों, खतौनी अभिलेखों, IGRS रिकॉर्ड, RTI, स्पीड पोस्ट, विभागीय पत्राचार और जीपीएस आधारित फोटो-वीडियो के आधार पर कई ऐसे प्रश्न सामने आए हैं, जिनसे पूरे प्रकरण की पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले लगभग एक वर्ष से लगातार शिकायतें करने के बावजूद न केवल सरकारी भूमि पर निर्माण कार्य नहीं रोका गया, बल्कि शिकायतों के निस्तारण, राजस्व रिकॉर्ड और IGRS पोर्टल की प्रविष्टियों में भी विरोधाभास दिखाई देता है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से डिजिटल और तकनीकी जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
बाहरी लोगों पर सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप
शिकायतकर्ता धर्मेंद्र तिवारी और अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग दस बाहरी लोग स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों के सहयोग से सरकारी पीसीएफ गोदाम की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि पर कब्जा करने पहुंचे। ग्रामीणों का दावा है कि इस दौरान गांव के निवासी रामतेज के कृषि पट्टे से संबंधित दस्तावेज दिखाकर सरकारी भूमि पर निर्माण कार्य शुरू कराया गया, जबकि वास्तविक निर्माण सरकारी पीसीएफ गोदाम और सार्वजनिक मार्ग से जुड़ी भूमि पर किया गया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार निर्माण कार्य के दौरान गांव के लोगों ने इसका विरोध किया और 27 मई 2025 को पहली सामूहिक शिकायत IGRS पोर्टल पर दर्ज कराई।
CRO के दो आदेशों ने बढ़ाए सवाल
पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मुख्य राजस्व अधिकारी (CRO) के दो आदेश माने जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार वाद संख्या 2894/2025 में 14 जुलाई 2025 के आदेश में न्यायालय ने उल्लेख किया था कि विवादित भूमि पर “आज तक कोई निर्माण नहीं किया गया है।” लेकिन उसी वाद संख्या 2894/2025 में 23 फरवरी 2026 को पारित अंतिम आदेश में उल्लेख किया गया कि “निर्माण किया गया है, जो देखने से काफी पुराना प्रतीत होता है।” यही विरोधाभास पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि जुलाई 2025 तक निर्माण नहीं हुआ था, तो फरवरी 2026 में वही निर्माण “काफी पुराना” कैसे माना गया?
सितंबर 2023 की गूगल मैप तस्वीरों का भी हवाला
शिकायतकर्ताओं ने सितंबर 2023 की गूगल मैप तस्वीरें भी प्रस्तुत की है। उनका दावा है कि उस समय संबंधित भूमि पूरी तरह खाली थी तथा वहां किसी प्रकार का निर्माण मौजूद नहीं था। इसी आधार पर शिकायतकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि जब सितंबर 2023 में भूमि खाली थी, जुलाई 2025 तक CRO के आदेश के अनुसार निर्माण नहीं हुआ था, तो फरवरी 2026 में उसी निर्माण को “पुराना निर्माण” किस आधार पर माना गया?
सरकारी पीसीएफ गोदाम और निजी वाद में एक जैसा गाटा यूनिक कोड?
मामले से जुड़े दस्तावेजों में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। वाद संख्या 2894/2025 के सारांश में विवादित भूमि का विवरण निम्न प्रकार दर्ज है—
गाटा संख्या: 21
गाटा यूनिक कोड: 169666-0021-200364
क्षेत्रफल: 0.2530 हेक्टेयर
शिकायतकर्ता का दावा है कि यही गाटा यूनिक कोड और यही क्षेत्रफल सरकारी पीसीएफ गोदाम की खतौनी में भी दर्ज है। दूसरी ओर रामतेज के कृषि पट्टे की खतौनी में क्षेत्रफल 0.0190 हेक्टेयर, छह हिस्सेदार, अलग गाटा यूनिक कोड दर्ज बताया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि दोनों भूमि अलग-अलग हैं तो निजी पट्टे और सरकारी भूमि का विवरण एक जैसा कैसे हो सकता है? इसी तकनीकी बिंदु की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की जा रही है।
पट्टे से कई गुना अधिक कब्जे का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि रामतेज के नाम आवंटित कृषि पट्टे का कुल क्षेत्रफल केवल 0.0190 हेक्टेयर है। जबकि मौके पर कथित निर्माण इससे कई गुना अधिक क्षेत्र में किया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जिस भूमि पर निर्माण हुआ वह सरकारी पीसीएफ गोदाम से जुड़ी लगभग 0.2530 हेक्टेयर भूमि है, जो रामतेज के मूल पट्टे से लगभग 300 मीटर दूर स्थित है।
IGRS रिकॉर्ड में बदलाव के आरोप
शिकायतकर्ताओं ने IGRS शिकायत संख्या 400179260012787 से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध कराए हैं। उनका आरोप है कि यह शिकायत मूल रूप से राजस्व एवं आपदा विभाग में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के संबंध में दर्ज की गई थी। लेकिन बाद में विभाग बदलकर पुलिस विभाग कर दिया गया। शिकायत की श्रेणी बदल गई। कई बार तिथि में परिवर्तन दिखाई दिया। बाद में रिकॉर्ड फिर पूर्व स्थिति में दिखाई दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि उन्होंने प्रत्येक चरण का प्रिंट सुरक्षित न रखा होता तो यह पूरा घटनाक्रम सामने नहीं आ पाता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक अन्य IGRS शिकायत का निस्तारण बिना विस्तृत आख्या के कर दिया गया।
18 IGRS, 22 RTI, 28 स्पीड पोस्ट और हजारों सोशल मीडिया पोस्ट
शिकायतकर्ता के अनुसार पिछले लगभग एक वर्ष में उन्होंने 18 IGRS शिकायतें, 22 RTI आवेदन, 28 स्पीड पोस्ट, 32 ई-मेल, लगभग 10 हजार फेसबुक पोस्ट, 700 से अधिक एक्स (पूर्व ट्विटर) पोस्ट के माध्यम से मामले को मुख्यमंत्री कार्यालय, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त, राजस्व परिषद, एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स, पीसीएफ मुख्यालय और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया।
पीसीएफ विभाग ने भी की शिकायत
समाचार के लिए उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार जून 2026 में पीसीएफ गोदाम के प्रभारी द्वारा थाना कूरेभार को लिखित प्रार्थना पत्र दिया गया। पत्र में आरोप लगाया गया कि गोदाम के सामने सरकारी भूमि और गोदाम तक जाने वाले मार्ग पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। पत्र में तत्काल निर्माण रुकवाने तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई।
SDM को व्हाट्सएप पर भेजी गई थीं लोकेशन और जीपीएस फोटो
शिकायतकर्ता ने व्हाट्सएप संदेशों, जीपीएस फोटो और वीडियो भी उपलब्ध कराए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर उनका दावा है कि तत्कालीन एसडीएम को निर्माण कार्य शुरू होने के समय लगातार सूचना दी गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार निर्माण के दौरान फोन किया गया। व्हाट्सएप पर लोकेशन भेजी गई।जीपीएस फोटो भेजे गए। मौके पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई। इसके बावजूद कथित निर्माण कार्य जारी रहा।
लिंटर पूरा होने के बाद भी जारी रहा विवाद
ग्रामीणों के अनुसार मार्च 2026 के अंत में पुनः निर्माण शुरू हुआ। उनका दावा है कि 3 अप्रैल 2026 तक भवन का लिंटर डाला जा चुका था। इसके बाद 22 जून 2026 को पुनः निर्माण शुरू होने का आरोप लगाया गया। हालांकि शिकायतकर्ताओं के अनुसार इस दौरान प्रशासन द्वारा मौखिक रूप से निर्माण रुकवाने की बात कही गई। सीमांकन हुआ, रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं शिकायतकर्ताओं के अनुसार 12 अप्रैल 2026 को तत्कालीन एसडीएम ने स्थल निरीक्षण किया। 14 मई 2026 को नायब तहसीलदार द्वारा सीमांकन कराया गया। लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि सीमांकन रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई।
RTI में भी नहीं मिला स्पष्ट जवाब
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कई आवेदन दिए। लेकिन कथित रूप से कई महत्वपूर्ण प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया। इसी कारण अब पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग तेज हो गई है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
शिकायतकर्ताओं और ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए। गाटा यूनिक कोड और राजस्व अभिलेखों की तकनीकी जांच कराई जाए। कथित अवैध निर्माण की समय-सीमा का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए। सीमांकन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। IGRS रिकॉर्ड में हुए कथित परिवर्तनों की जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाए।
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