lambhua-lekhpal-protest-extra-charge-bags-submitted-sultanpur

लंभुआ में लेखपालों का बड़ा फैसला: अतिरिक्त चार्ज छोड़ा, तहसील में जमा किए बस्ते; दर्जनों गांवों के काम प्रभावित होने के आसार

सुलतानपुर। जिले में लेखपालों और प्रशासन के बीच बढ़ता टकराव अब खुलकर सामने आने लगा है। लेखपाल संघ की विभिन्न लंबित मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से नाराज लेखपालों ने अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत अतिरिक्त क्षेत्रों का कार्यभार छोड़ते हुए संबंधित ग्राम पंचायतों के बस्ते तहसील कार्यालय में जमा कर दिए। इस कदम के बाद तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है और दर्जनों गांवों में राजस्व से जुड़े कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

मंगलवार को लेखपाल संघ उपशाखा लंभुआ के बैनर तले तहसील क्षेत्र के सभी लेखपाल एकजुट हुए और अतिरिक्त चार्ज वाले गांवों के बस्ते तहसील कार्यालय में जमा कर दिए। लेखपाल संघ ने पहले ही प्रशासन को चेतावनी दी थी कि यदि उनकी समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो वे अतिरिक्त जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर लेंगे।

जानकारी के अनुसार, लेखपाल संघ ने बीते 8 मई को जिलाधिकारी सुलतानपुर को ज्ञापन सौंपते हुए 16 मई तक विभिन्न लंबित समस्याओं के समाधान की मांग की थी। संघ ने स्पष्ट किया था कि यदि निर्धारित समय सीमा तक मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 19 मई से अतिरिक्त चार्ज छोड़ने का निर्णय लागू किया जाएगा। प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस समाधान न निकलने के बाद लेखपालों ने अपने ऐलान को अमल में ला दिया।

लेखपालों के इस कदम से तहसील क्षेत्र में कई जरूरी सेवाओं पर असर पड़ सकता है। वरासत, पैमाइश, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र सत्यापन, समाधान दिवस, किसान सम्मान निधि और फार्मर रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।

संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि लंभुआ तहसील में 104 क्षेत्रों के सापेक्ष केवल 42 लेखपाल ही कार्यरत हैं। ऐसे में एक-एक लेखपाल को दो से तीन क्षेत्रों का कार्यभार संभालना पड़ रहा था। लगातार बढ़ते कार्यभार और कर्मचारियों की कमी के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा था। इसी के चलते लेखपाल संघ ने तहसील के 62 अतिरिक्त क्षेत्रों का चार्ज छोड़ते हुए बस्ते वापस जमा कर दिए हैं।

तहसील अध्यक्ष बलराम सिंह ने बताया कि यह निर्णय जिलाशाखा सुलतानपुर के निर्देश पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक स्टाफ की कमी दूर नहीं होती और लंबित भुगतान का निस्तारण नहीं किया जाता, तब तक लेखपाल केवल अपने मूल कार्यक्षेत्र में ही काम करेंगे।

बस्ता जमा होने के बाद तहसील प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक एसडीएम कार्यालय ने वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने के लिए मंथन शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जनता के जरूरी कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और शासन को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत करा दिया गया है।

इस दौरान जिला महामंत्री रिंकू पाल, तहसील मंत्री संदीप वर्मा, उपमंत्री स्वयं प्रकाश, कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश, ऑडिटर रवि अग्रहरि, कनिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश सहित बड़ी संख्या में लेखपाल मौजूद रहे।

Author Profile

Suyash Chitranshi
Suyash Chitranshi