सुलतानपुर। सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद पार्टी नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपते हुए अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित गबन प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने सरकार की विभिन्न नीतियों पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और कानून व्यवस्था जैसे कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
भाकपा नेताओं का कहना था कि अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में अब तक हुई कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उनका आरोप है कि एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई एफआईआर केवल पूरे मामले का एक छोटा हिस्सा है और वास्तविक तथ्यों को सामने लाने के लिए स्वतंत्र न्यायिक एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विभिन्न जनसमस्याओं के समाधान की मांग की। ज्ञापन के माध्यम से पार्टी ने कुल नौ प्रमुख मांगें राष्ट्रपति के समक्ष रखीं।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित गबन मामले में एसआईटी द्वारा दर्ज एफआईआर पूरे प्रकरण का केवल “टिप ऑफ द आइसबर्ग” है। पार्टी का कहना है कि केवल कुछ कनिष्ठ पदाधिकारियों पर कार्रवाई कर मामले को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि वास्तविक जिम्मेदार लोगों तक जांच नहीं पहुंच रही है।
भाकपा ने यह भी कहा कि ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पार्टी नेताओं ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को पर्याप्त कार्रवाई मानने से इनकार करते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल आवश्यक है।
पार्टी ने अपने ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया कि अयोध्या के जिलाधिकारी स्वयं ट्रस्ट के पदेन सदस्य हैं। ऐसे में उनके अधीन गठित एसआईटी से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना कठिन है। इसी आधार पर भाकपा ने किसी स्वतंत्र न्यायिक निकाय या निष्पक्ष एजेंसी से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। इसके साथ ही पार्टी ने श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में चढ़ाए जा रहे सोने, चांदी और नकद दान की रसीद न दिए जाने के मुद्दे को भी गंभीर बताते हुए इस संबंध में पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता जताई।
प्रदर्शन के दौरान भाकपा नेताओं ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। ज्ञापन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर तत्काल प्रभावी रोक लगाने की मांग की गई। पार्टी ने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के बढ़ते निजीकरण तथा बाजारीकरण पर भी चिंता व्यक्त की। ज्ञापन में मांग की गई कि निजी स्कूलों और निजी अस्पतालों द्वारा ली जाने वाली फीस सरकार निर्धारित करे ताकि आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ कम हो सके। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी के बावजूद पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की ऊंची कीमतों को लेकर भी सरकार से तत्काल राहत देने की मांग की गई।
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