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चांदा में फिर शुरू हुआ सील किया गया नर्सिंग होम! स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल, मिलीभगत के आरोप

सुलतानपुर। जनपद के चांदा कस्बे में एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। करीब पांच माह पहले बिना पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) मरीज का ऑपरेशन किए जाने की शिकायत पर सील किए गए आयुषी पॉलीक्लिनिक के दोबारा संचालित होने की खबर ने क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से क्लीनिक का सील तोड़कर फिर से इलाज और मरीजों को देखने का कार्य शुरू कर दिया गया है।

मामले को लेकर लोगों में नाराजगी है और स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिस क्लीनिक को नियमों के उल्लंघन के कारण सील किया गया था, वह आखिर किसके आदेश पर दोबारा संचालित होने लगा।

पांच माह पहले स्वास्थ्य विभाग ने की थी कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, लगभग पांच महीने पूर्व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आयुषी पॉलीक्लिनिक पर छापेमारी की थी। आरोप था कि बिना वैध पंजीकरण के मरीजों का उपचार और ऑपरेशन किया जा रहा था। जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए नर्सिंग होम को सील कर दिया था।

उस समय विभाग ने इसे बड़ी कार्रवाई बताते हुए अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों और क्लीनिकों के खिलाफ अभियान चलाने का दावा किया था। लेकिन अब उसी क्लीनिक के दोबारा खुलने से विभाग की कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।

शादी की आड़ में खोला गया सील?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नर्सिंग होम की संचालिका डॉ. रंजन यादव के विवाह समारोह का हवाला देकर अधिकारियों से सांठगांठ की गई और इसी बहाने सील हटाकर क्लीनिक को फिर से संचालित कर दिया गया।

ग्रामीणों और कस्बे के लोगों का कहना है कि यदि क्लीनिक को कानूनी प्रक्रिया के तहत खोला गया है तो संबंधित आदेश सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं यदि सील हटाने की कोई वैध अनुमति नहीं थी तो यह गंभीर प्रशासनिक अनियमितता का मामला हो सकता है।

ऑनलाइन आवेदन का हवाला, लेकिन आदेश पर चुप्पी

सूत्रों के अनुसार, विभागीय अधिकारी क्लीनिक के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन आवेदन लंबित होने की बात कह रहे हैं। हालांकि, इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा कि सील खोलने का आदेश किस स्तर से जारी हुआ और किन नियमों के तहत क्लीनिक को दोबारा संचालित होने की अनुमति मिली। यही कारण है कि पूरे घटनाक्रम को लेकर लोगों में संदेह बढ़ता जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

संचालिका की डिग्री को लेकर भी उठते रहे हैं सवाल

आयुषी पॉलीक्लिनिक की संचालिका डॉ. रंजन यादव की शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल डिग्री को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर कई बार उनकी योग्यता की जांच कराने की मांग की जा चुकी है। हालांकि, अब तक इस संबंध में कोई सार्वजनिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जिससे विवाद और गहराता जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न

एक ओर स्वास्थ्य विभाग बिना पंजीकरण संचालन के आरोप में क्लीनिक को सील करता है और दूसरी ओर वही संस्थान कुछ महीनों बाद फिर से संचालित होने लगता है। ऐसे में विभाग की कार्रवाई, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े होना स्वाभाविक है।

क्षेत्रीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग करते हुए कहा है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि क्लीनिक को वैध प्रक्रिया के तहत अनुमति दी गई है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि भ्रम और विवाद की स्थिति समाप्त हो सके।

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Suyash Chitranshi
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