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भरत तिवारी के फर्जी एनकाउंटर के दोषी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर कड़ी कार्रवाई करे सरकार : अशोक सिंह बिसेन

सुलतानपुर। बिहार के भोजपुर जिले में युवक भरत तिवारी की कथित फर्जी एनकाउंटर में हुई मौत को लेकर जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। बिहार में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने के बाद अब इसका असर उत्तर प्रदेश में भी दिखाई देने लगा है। सोमवार शाम सुलतानपुर में समाजवादी पार्टी के नेताओं, पदाधिकारियों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कैंडल मार्च निकालकर भरत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित की और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

नगर के पंत स्पोर्ट्स स्टेडियम से शुरू हुआ यह कैंडल मार्च बस स्टेशन होते हुए शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क तक पहुंचा। हाथों में जलती मोमबत्तियां और विरोध प्रदर्शन से जुड़ी तख्तियां लिए सपा कार्यकर्ता पूरे मार्ग पर न्याय की मांग करते हुए नारेबाजी करते रहे। प्रदर्शनकारियों ने “भरत तिवारी अमर रहे”, “भरत तिवारी को न्याय दो” तथा “बिहार पुलिस हाय-हाय” जैसे नारे लगाए।

न्यायिक जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
कैंडल मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार, बिहार सरकार तथा देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं न्यायिक जांच कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि किसी व्यक्ति पर कोई गंभीर आरोप था तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, न कि उसे गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया जाता।

समाजवादी पार्टी अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव एडवोकेट अशोक सिंह बिसेन ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भोजपुर जिले की पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने 28-30 वर्षीय भरत तिवारी को कथित तौर पर सरेंडर करने के बावजूद गोली मार दी। उन्होंने आरोप लगाया कि युवक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और न ही उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज था।

“अपराधी नहीं था भरत तिवारी”
अशोक सिंह बिसेन ने कहा कि जब भरत तिवारी की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि सामने नहीं आई तो अब उसे मानसिक रूप से विक्षिप्त बताने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है और यदि कोई व्यक्ति पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करता है, तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक युवक की मौत नहीं, बल्कि मानवाधिकारों और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर उनके खिलाफ हत्या सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग
प्रदर्शन के दौरान अशोक सिंह बिसेन ने कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। उनका कहना था कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आम जनता का कानून और न्याय व्यवस्था से विश्वास कमजोर होगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी नागरिक को बिना न्यायिक प्रक्रिया के जीवन से वंचित नहीं किया जा सकता। इसलिए इस मामले में पारदर्शी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। बिहार पुलिस ने जघन्य अपराध किया है। केंद्र और राज्य सरकार को भी दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग
युवा नेता अशोक सिंह बिसेन ने केंद्र सरकार और बिहार सरकार से भरत तिवारी के परिजनों को न्याय दिलाने के साथ-साथ आर्थिक सहायता प्रदान करने की भी मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा कि मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि परिवार को आर्थिक संबल मिल सके। उन्होंने कहा कि परिवार ने अपना युवा सदस्य खोया है और ऐसी स्थिति में सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए हरसंभव सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।

बड़ी संख्या में शामिल हुए कार्यकर्ता
कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन में एडवोकेट अशोक सिंह बिसेन, डॉ. गार्गी तिवारी, शिव मंगल तिवारी, भजन यादव, सुल्तान खान, सुरेश गौतम, प्रदीप कुमार, शिव कुमार तिवारी, दिलीप मिश्रा, रवीन्द्र तिवारी, अरुण द्विवेदी, शिवम पांडेय, आदित्य यादव सहित सैकड़ों समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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Suyash Chitranshi
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