सुलतानपुर। जनपद के बल्दीराय तहसील क्षेत्र स्थित पारा चौराहे पर सातवीं मोहर्रम के अवसर पर अकीदत, श्रद्धा और गम के माहौल में यौम-ए-अज़ा मनाया गया। इस दौरान क्षेत्र की दो दर्जन से अधिक अंजुमनों ने एकत्र होकर नौहाख्वानी और मातम के माध्यम से कर्बला के शहीदों को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया। पूरे क्षेत्र में ‘या हुसैन’ की सदाएं गूंजती रहीं और अज़ादार गम-ए-हुसैन में डूबे नजर आए।
मोहर्रम के इस महत्वपूर्ण अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने धार्मिक एकता और आस्था का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। मातमी जुलूसों और नौहाख्वानी के दौरान माहौल पूरी तरह गमगीन रहा। अज़ादारों ने इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों की शहादत को याद करते हुए मातम किया तथा उनके बताए गए सत्य, न्याय और इंसानियत के रास्ते पर चलने का संकल्प दोहराया।
पारा चौराहे पर आयोजित यौम-ए-अज़ा कार्यक्रम में क्षेत्र की अनेक अंजुमनों ने सक्रिय भागीदारी की। इनमें अंजुमन कारवाने अज़ा चक्कारीभीट, अंजुमन मोहम्मदपुर काजी, अंजुमन हुसैनी सत्तर, अंजुमन चकमूसी, अंजुमन उसरी, अंजुमन सोनबरसा, अंजुमन आलामऊ, अंजुमन सेमरा, अंजुमन चकतेंदुआ, अंजुमन लश्करे अब्बास इसौली, अंजुमन यादगारे हुसैनी वल्लीपुर, अंजुमन निनावां, अंजुमन दौनौ, अंजुमन पटैला, अंजुमन आलियाबाद, अंजुमन नन्दौली, अंजुमन पारा, अंजुमन गौराबारामऊ, अंजुमन सादुल्लापुर, अंजुमन दरियांवलाल, अंजुमन बघौना, अंजुमन फूलपुर, अंजुमन कुमासी, अंजुमन गदियाने तथा अंजुमन धौरहरा समेत क्षेत्र की अन्य अंजुमनों ने भाग लिया।
इन सभी अंजुमनों के मातमी दस्तों ने अपने-अपने अंदाज में नौहे पेश किए और कर्बला के दर्दनाक वाकये को याद करते हुए सीना-ज़नी की। नौहाख्वानी के दौरान उपस्थित अज़ादार भावुक हो उठे और इमाम हुसैन की शहादत को याद कर उनकी कुर्बानियों को नमन किया।
कार्यक्रम में शामिल अज़ादार असगर रज़ा ने कहा कि कर्बला की घटना केवल एक धार्मिक इतिहास नहीं बल्कि पूरी इंसानियत के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) ने अत्याचार और अन्याय के सामने झुकने के बजाय सत्य और इंसाफ की राह को चुना। उनकी शहादत सब्र, त्याग, इंसानियत और हक़ के लिए संघर्ष का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि मोहर्रम का महीना हमें यह सीख देता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानी आज भी दुनिया भर के लोगों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देती है।
कार्यक्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में अनुशासन और धार्मिक सौहार्द का वातावरण देखने को मिला। विभिन्न गांवों और क्षेत्रों से आए लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से कार्यक्रम में भाग लिया। अंजुमनों द्वारा प्रस्तुत किए गए मातमी कार्यक्रमों को देखने और सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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