सुलतानपुर। जनपद के चांदा क्षेत्र स्थित हजरत बाबा बहादुर शाह रहमतुल्ला अलैह की दरगाह पर सालाना उर्स का शुभारंभ पूरे धार्मिक उल्लास, श्रद्धा और अकीदत के साथ हो गया। उर्स के पहले ही दिन बड़ी संख्या में जिले के साथ-साथ आसपास के जनपदों से आए जायरीन और अकीदतमंदों ने दरगाह पर हाजिरी लगाई, चादरपोशी की और देश-दुनिया में अमन, शांति, खुशहाली तथा आपसी भाईचारे की दुआ मांगी। दरगाह परिसर में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
सालाना उर्स के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों का विशेष आयोजन किया जा रहा है। फातिहा, कव्वाली, लंगर और अन्य रूहानी आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर बाबा की बारगाह में अपनी अकीदत पेश कर रहे हैं। दरगाह परिसर में आध्यात्मिक माहौल के बीच लोगों ने सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश भी दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष आयोजित होने वाला यह उर्स क्षेत्र की साझा संस्कृति और धार्मिक एकता का जीवंत उदाहरण है।
उर्स के मद्देनजर प्रशासन ने भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में दरगाह परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
उर्स के दौरान अकीदतमंदों ने दरगाह पर चादर और फूल पेश कर बाबा बहादुर शाह रहमतुल्ला अलैह की मजार पर अकीदत का नजराना पेश किया। लोगों ने अपने परिवार, समाज और देश की तरक्की, खुशहाली और शांति के लिए विशेष दुआएं मांगीं। दरगाह परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और लोग पूरी श्रद्धा के साथ धार्मिक रस्मों में शामिल होते रहे।
दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे जायरीन ने बताया कि वे हर वर्ष उर्स में शामिल होकर बाबा की बारगाह में हाजिरी लगाते हैं। उनका विश्वास है कि यहां की गई दुआएं कबूल होती हैं और मन को आध्यात्मिक सुकून मिलता है।
सालाना उर्स के दौरान आयोजित कव्वाली कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को सूफी संगीत की रंगत में सराबोर कर दिया। सूफियाना कलाम और बाबा की शान में पेश की गई कव्वालियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं फातिहा और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
उर्स में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था भी की गई है, जहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। यह परंपरा सामाजिक समरसता और मानवता के संदेश को मजबूत करती है।
चांदा का यह सालाना उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक भी माना जाता है। यहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ शामिल होकर आपसी प्रेम, सम्मान और भाईचारे का संदेश देते हैं।
उर्स में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं। दरगाह परिसर और आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई है। भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और आवश्यक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।
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