सुलतानपुर। आदि गंगा के रूप में पूजनीय माँ गोमती के प्रति श्रद्धा, आस्था और प्रकृति संरक्षण का अनूठा संदेश रविवार सायंकाल सीताकुण्ड धाम, कुशभवनपुर में देखने को मिला। गोमती मित्र मण्डल समिति, सुलतानपुर के तत्वावधान में आयोजित भव्य माँ गोमती आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर दीप प्रज्ज्वलित किए और माँ गोमती की आराधना की। पूरे आयोजन के दौरान नदी तट पर भक्ति, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम दिखाई दिया।
दीपों की अलौकिक रोशनी, वैदिक मंत्रोच्चार, घंटियों की मधुर ध्वनि और “हर-हर गोमती” के जयघोष से सीताकुण्ड धाम का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से माँ गोमती की आरती उतारकर प्रदेश की सुख-समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और समाज के कल्याण की कामना की। आयोजन में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली।
रविवार की सायंकाल आयोजित इस विशेष आरती कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर माँ गोमती के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। सीताकुण्ड धाम स्थित गोमती तट दीपों की पंक्तियों से जगमगा उठा और पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया गया।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माँ गोमती की पूजा-अर्चना की। सामूहिक आरती के समय उपस्थित लोगों ने एक स्वर में भजन और मंत्रोच्चार किए, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिरस में डूब गया। आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों को अपनी सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति भी जागरूक करना था।
आयोजन का संचालन गोमती मित्र मण्डल समिति, सुलतानपुर द्वारा किया गया। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि माँ गोमती केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता और जनजीवन की जीवनरेखा हैं। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह नदी की स्वच्छता, निर्मलता और संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाए।
समिति की ओर से यह संदेश भी दिया गया कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत किया जा सकता है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर गोमती नदी को स्वच्छ रखने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखा जा सकता है।
कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं ने माँ गोमती के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ-साथ नदी संरक्षण का संकल्प भी लिया। आयोजकों ने कहा कि धार्मिक आस्था तभी सार्थक होगी जब हम अपनी नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने का प्रयास करेंगे। इस अवसर पर लोगों से प्लास्टिक का उपयोग कम करने, नदी में कचरा न फेंकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए जनजागरण अभियान चलाने की अपील भी की गई।
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