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प्रधानों को जांच की धमकी देने वाले बयान पर भड़के अनूप सांडा, बोले- लोकतंत्र का अपमान करने पर प्रधानों से माफी मांगें विनोद सिंह

सुलतानपुर। पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ समाजवादी पार्टी नेता अनूप सांडा ने सुलतानपुर सदर विधायक विनोद सिंह के एक कथित बयान को लेकर उन पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर जारी एक लंबे वीडियो संदेश और पोस्ट के माध्यम से अनूप सांडा ने विधायक विनोद सिंह के बयान को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

दरअसल, हाल ही में विधायक विनोद सिंह का एक भाषण वायरल हुआ था। इस भाषण में कथित तौर पर कहा गया था कि जो ग्राम प्रधान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विरोध करेंगे, उनके खिलाफ इतनी जांच कराई जाएगी कि उनका जीना मुश्किल हो जाएगा। इसी बयान को आधार बनाकर सपा नेता अनूप सांडा ने भाजपा और विधायक विनोद सिंह पर निशाना साधा।

लोकतंत्र की पहली सीढ़ी हैं ग्राम प्रधान : अनूप सांडा
अपने फेसबुक संदेश में अनूप सांडा ने कहा कि ग्राम प्रधान लोकतंत्र की पहली सीढ़ी होते हैं। वे किसी राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह पर नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत जनसंपर्क, सेवा और लोकप्रियता के आधार पर चुनाव जीतते हैं। ऐसे में किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा उन्हें धमकाना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद की सरकार चुनने और उसका समर्थन या विरोध करने का अधिकार देता है। यदि कोई जनप्रतिनिधि विरोध करने वालों को जांच और कार्रवाई की धमकी देता है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के विपरीत है।

“अहंकार लोकतंत्र के लिए खतरनाक”
अनूप सांडा ने विधायक विनोद सिंह पर अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब जनता बदलाव का मन बना लेती है तो बड़े-बड़े राजनीतिक ताज भी गिर जाते हैं। सपा नेता ने कहा कि यदि विधायक के बयान से ग्राम प्रधानों के सम्मान और स्वाभिमान को ठेस पहुंची है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पूरे देश के हैं, किसी दल विशेष के नहीं
अनूप सांडा ने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री किसी एक राजनीतिक विचारधारा, जाति, धर्म या समुदाय के नहीं होते, बल्कि पूरे देश और प्रदेश के नागरिकों के प्रतिनिधि होते हैं। ऐसे में किसी नागरिक द्वारा सरकार की आलोचना या विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी गांव के लोगों को केवल राजनीतिक मतभेद के आधार पर संदेह की नजर से देखा जाएगा तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

सांप्रदायिक बयानबाजी पर भी जताई आपत्ति
अपने संबोधन में अनूप सांडा ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई हिंदू-मुस्लिम सहित सभी समुदायों के लोगों के साझा संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में विभिन्न धर्मों और वर्गों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी एक समुदाय को आतंकवाद या राष्ट्रविरोध से जोड़कर देखना देश की एकता और अखंडता के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और जनप्रतिनिधियों को अपने पद की शपथ के अनुरूप निष्पक्ष और संयमित भाषा का प्रयोग करना चाहिए।

2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी
अनूप सांडा ने आरोप लगाया कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा नेताओं में राजनीतिक बेचैनी दिखाई दे रही है और इसी कारण इस प्रकार की बयानबाजी सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत और हार लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इसके लिए संविधान, लोकतांत्रिक मर्यादाओं और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।

जनता के सेवक होते हैं जनप्रतिनिधि
अपने संदेश के अंत में अनूप सांडा ने कहा कि लोकतंत्र में विधायक, सांसद या मंत्री जनता के शासक नहीं बल्कि सेवक होते हैं। उन्होंने क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों से भी अपील की कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक सौहार्द और संविधान की मर्यादा को बनाए रखने के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को हमेशा विनम्र रहना चाहिए और जनता के अधिकारों तथा सम्मान का संरक्षण करना चाहिए।

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Suyash Chitranshi
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