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अहमदाबाद में जमीन के सौदों में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी, पुराने अदालती रिकॉर्ड भी चर्चा में

अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में जमीन और प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़े दो अलग-अलग विवादों ने बड़ा मामला खड़ा कर दिया है। नवरंगपुरा पुलिस थाने में दर्ज दो शिकायतों में कारोबारियों ने जमीन के सौदों के नाम पर कुल 4.84 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी किए जाने के आरोप लगाए हैं। शिकायतों में साणंद क्षेत्र के आवासीय प्लॉट और असारवा क्षेत्र की जमीन से जुड़े अलग-अलग लेन-देन का जिक्र है।

मामले की खास बात यह है कि शिकायतकर्ताओं ने भुगतान, जमीन के दस्तावेजों और कथित बकाया रकम को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं, संबंधित व्यक्तियों के पुराने अदालती मामलों के रिकॉर्ड भी सामने आए हैं। हालांकि, इन सभी मामलों को अलग-अलग कानूनी कार्यवाही के रूप में देखना जरूरी है।

पहला मामला: साणंद के प्लॉट सौदे में ₹2.34 करोड़ का विवाद
पहली शिकायत बोपल निवासी 63 वर्षीय संजय जयंतिलाल मेहता की ओर से दर्ज कराई गई है। शिकायत के मुताबिक, साणंद तालुका के मणिपुर गांव स्थित ‘सुरधारा रेजिडेंशियल प्लॉट्स’ योजना के प्लॉट नंबर 37 और 38 को लेकर सौदा हुआ था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस सौदे के तहत 1.25 करोड़ रुपये एडवांस दिए गए थे। बाकी भुगतान आठ महीने के भीतर निर्माण सामग्री के जरिए समायोजित किए जाने की बात तय हुई थी। आरोप है कि शुरुआत में कुछ समय तक निर्माण सामग्री और नकद के रूप में भुगतान किया गया, लेकिन बाद में यह सिलसिला रुक गया।

शिकायत में दावा किया गया है कि करीब 2.34 करोड़ रुपये की रकम अब तक वापस नहीं मिली। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि सुरक्षा के तौर पर दिया गया चेक बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत करने पर स्टॉप पेमेंट के कारण क्लियर नहीं हुआ।

इस मामले में भरतकुमार प्राणलाल पोपट, उनकी पत्नी हर्षाबेन भरतकुमार पोपट और विलेश प्रफुल्लचंद्र शेठ के नाम शिकायत में सामने आए हैं।

दूसरा मामला: असारवा की जमीन पर मॉर्गेज का आरोप
दूसरी शिकायत सैटेलाइट निवासी 37 वर्षीय पार्थ कमलेशभाई दोशी ने दर्ज कराई है। इस शिकायत में असारवा तालुका के मुथिया गांव की गैर-कृषि जमीन से जुड़े सौदे को लेकर 2.50 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, जमीन के सौदे के संबंध में 18 नवंबर 2025 को बनाखत किया गया था और अलग-अलग माध्यमों से रकम का भुगतान किया गया। आरोप है कि बाद में पता चला कि संबंधित जमीन पहले से ही आदित्य बिड़ला समूह के पास मॉर्गेज रखी गई थी।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि जमीन के संबंध में सार्वजनिक नोटिस जारी होने के बाद नीलामी से जुड़ी सूचना सामने आई, जिससे कथित मॉर्गेज की जानकारी मिली। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस स्थिति के बावजूद न तो जमीन को मॉर्गेज से मुक्त कराया गया और न ही भुगतान की गई रकम लौटाई गई।

इस मामले में भरतकुमार पोपट, पार्थ बरोत, जिल भरत पोपट, पराग शाह सहित अन्य लोगों के नाम शिकायत में शामिल बताए गए हैं।

पुराने अदालती रिकॉर्ड भी आए चर्चा में
उपलब्ध अदालती दस्तावेजों के अनुसार, भरतकुमार प्राणलाल पोपट से जुड़े एक पुराने चेक बाउंस मामले में अहमदाबाद की अदालत ने 31 मार्च 2018 को दोषसिद्धि का फैसला सुनाया था। इस मामले में एक वर्ष के साधारण कारावास और चेक की रकम के बराबर मुआवजा देने का आदेश दिया गया था।

इसके बाद 2 मार्च 2020 को अपीलीय अदालत ने उनकी अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। यह पुराना मामला मौजूदा शिकायतों से अलग है और इसे वर्तमान आरोपों का न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

इसके अलावा, गुजरात हाईकोर्ट के कुछ अन्य आदेशों में भी संबंधित पक्षों के नाम सामने आते हैं। हालांकि, उन आदेशों में अलग-अलग विवाद और कानूनी परिस्थितियां शामिल हैं। इसलिए उन्हें मौजूदा शिकायतों में लगाए गए आरोपों का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर
दोनों शिकायतों में कुल 4.84 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस कर रही है। मामले में संबंधित पक्षों की भूमिका, भुगतान का वास्तविक विवरण, जमीन के स्वामित्व और मॉर्गेज से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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News Desk
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