सुलतानपुर। धर्म, तपस्या और आध्यात्मिक साधना की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत करते हुए पूज्य अभय चैतन्य फलाहारी सगरा पाठधीश्वर स्वामी मौनी जी महाराज द्वारा शुरू की गई चक्रीय दण्डवत परिक्रमा इन दिनों जनपद में श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। सीताकुंड धाम स्थित महाकाल आश्रम से प्रारंभ हुई यह विशेष साधना न केवल सनातन परंपरा की महानता को प्रदर्शित कर रही है, बल्कि श्रद्धालुओं को त्याग, संयम और आत्मबल का संदेश भी दे रही है।
बताया जा रहा है कि बीते 15 मई से सीताकुंड धाम स्थित महाकाल आश्रम में विशेष धार्मिक अनुष्ठान चल रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को पूज्य स्वामी मौनी जी महाराज ने लगभग पांच किलोमीटर लंबी चक्रवर्ती दण्डवत परिक्रमा का शुभारंभ किया। यह यात्रा पवित्र सीताकुंड घाट से शुरू होकर दीवानी चौराहा, कलेक्ट्रेट चौराहा, पंचमुखी चौराहा, शाहगंज चौराहा, चौक और ठठेरी बाजार होते हुए रामलीला मैदान स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंची।
कठोर मार्ग पर लेट-लेटकर कर रहे परिक्रमा
इस अनुष्ठान की सबसे विशेष बात यह है कि स्वामी मौनी जी महाराज पूरे मार्ग में भूमि पर लेट-लेटकर तथा एक ही दिशा में करवट लेते हुए दण्डवत परिक्रमा कर रहे हैं। कंक्रीट की कठोर सड़क पर इस प्रकार की साधना सामान्य व्यक्ति के लिए कल्पना से भी परे है। तेज धूप, शारीरिक पीड़ा और थकान के बावजूद निरंतर आगे बढ़ते रहना उनकी अटूट श्रद्धा, अद्भुत धैर्य और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण को दर्शाता है।
परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं और सेवाभावी लोगों द्वारा पहले साफ-सफाई कराई गई तथा जल छिड़काव की व्यवस्था की गई, जिससे साधना सुचारु रूप से संपन्न हो सके। पूरे मार्ग में भक्तों की भारी भीड़ मौजूद रही और लोग महाराज जी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते रहे।
सनातन परंपरा में तपस्या का जीवंत उदाहरण
धार्मिक विद्वानों के अनुसार सनातन संस्कृति में तपस्या का उद्देश्य केवल शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि मन, इंद्रियों और अहंकार पर विजय प्राप्त करना होता है। स्वामी मौनी जी महाराज की यह साधना इसी आध्यात्मिक दर्शन को साकार करती दिखाई दे रही है। उनकी परिक्रमा भगवान श्रीराम, माता सीता और भगवान शिव के प्रति अनन्य भक्ति और समर्पण का प्रतीक मानी जा रही है।
ठठेरी बाजार के प्राचीन शिव मंदिर में हुआ भव्य स्वागत
चौक क्षेत्र के वार्ड ठठेरी बाजार स्थित प्राचीन शिव मंदिर पर दण्डवत परिक्रमा पूर्ण होने के उपरांत पूज्य स्वामी मौनी जी महाराज का श्रद्धालुओं द्वारा भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान भक्तों ने महाराज जी का आशीर्वाद प्राप्त कर पुण्य लाभ अर्जित किया। कार्यक्रम में स्नान, स्वागत समारोह तथा प्रेरणादायी प्रवचनों का आयोजन किया गया। महाराज जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा, संयम और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला।
भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
अंश द्विवेदी के नेतृत्व में विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें राम सबद मिश्रा, डॉ. डी.एस. मिश्रा, सुभाष मिश्रा सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे क्षेत्र में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा और वातावरण हर-हर महादेव तथा धार्मिक जयघोषों से गूंजता रहा।
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