सुलतानपुर। जिले के बल्दीराय तहसील अंतर्गत ग्राम ऐंनपुर में सरकारी पीसीएफ (प्रांतीय सहकारी फेडरेशन) की भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब एक वर्ष से सरकारी भूमि पर बाहरी लोगों द्वारा कब्जा कर निर्माण कराया जा रहा है, जबकि प्रशासन और राजस्व विभाग की ओर से अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इस पूरे प्रकरण में न्यायालय के आदेश, राजस्व अभिलेख और निर्माण की अलग-अलग समय की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनके आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 0.2530 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर 8 से 10 बाहरी व्यक्तियों ने लाठी-डंडों और आर्थिक प्रभाव के बल पर कब्जा किया। उनका आरोप है कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी। ग्रामीणों के अनुसार पिछले एक वर्ष में केवल अधिकारियों के तबादले हुए, लेकिन विवादित भूमि को अतिक्रमण से मुक्त नहीं कराया गया।
उपलब्ध न्यायालयी आदेश के अनुसार, मुख्य राजस्व अधिकारी (CRO) न्यायालय में आवास आवंटन निरस्तीकरण से जुड़े एक वाद की सुनवाई के दौरान वादी पक्ष ने यह आशंका जताई थी कि विवादित भूमि पर निर्माण कर उसकी प्रकृति बदली जा सकती है। वादी ने न्यायालय से यथास्थिति बनाए रखने की मांग की थी।
14 जुलाई 2025 के आदेश में न्यायालय ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद यह उल्लेख किया कि यदि विवादित भूमि पर नया निर्माण कर दिया जाता है तो भूमि की प्रकृति बदल सकती है और इससे वाद प्रभावित होगा। इसी आधार पर अंतिम निर्णय तक मौके पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया।
मामले में 23 फरवरी 2026 को पारित एक अन्य आदेश में न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों और पक्षकारों के तर्कों का उल्लेख करते हुए कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार आवंटित भूमि पर पहले से निर्माण होने का दावा सामने आया। आदेश में यह भी उल्लेख है कि वादपत्र के साथ प्रस्तुत फोटोग्राफ के अवलोकन से निर्माण पुराना प्रतीत होता है और प्रथम दृष्टया वाद में विलंब का पहलू भी सामने आता है। इसी आधार पर न्यायालय ने वाद को पोषणीय न मानते हुए निरस्त कर दिया।
ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराई गई तस्वीरों में अलग-अलग समय की स्थिति दर्शाने का प्रयास किया गया है। उनके अनुसार सितंबर 2023 में संबंधित भूमि खाली दिखाई दे रही थी। इसके बाद फरवरी 2026 के न्यायालयी आदेश में निर्माण को पुराना बताया गया, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि 31 मार्च 2026 को दोबारा बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने निर्माण का स्वरूप दिखाने के लिए मिट्टी और चूने से पुताई कर वास्तविक स्थिति को अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
गांव के लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें देने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई होती तो सरकारी भूमि पर विवाद इतना नहीं बढ़ता।
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