सुलतानपुर। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बुधवार को सुलतानपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर उज्जैन में धार्मिक क्षेत्र के विकास से जुड़ी कथित भूमि खरीद को लेकर गंभीर आरोप लगाए। इसके साथ ही राम मंदिर चंदा मामले में गठित एसआईटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और लखनऊ में हुए कोचिंग अग्निकांड को लेकर योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
संजय सिंह ने कहा कि उज्जैन में जिस क्षेत्र के विकास के लिए सरकार हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है, उसी क्षेत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार द्वारा बड़े पैमाने पर जमीन खरीदे जाने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला केवल जमीन खरीद का नहीं, बल्कि सत्ता और सरकारी योजनाओं से जुड़े संभावित लाभ का भी है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में इस बयान के बाद चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सांसद के आरोपों ने एक बार फिर भूमि सौदों, धार्मिक परियोजनाओं और सरकारी पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि खबर लिखे जाने तक इन आरोपों पर मध्य प्रदेश सरकार या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
संजय सिंह ने दावा किया कि उज्जैन के उस धार्मिक क्षेत्र में, जहां सरकार बड़े पैमाने पर विकास कार्य कर रही है, मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार के सदस्यों ने 253 से 335 एकड़ तक जमीन खरीदी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा भूमि उपयोग (लैंड यूज) परिवर्तन किए जाने से पहले ही मुख्यमंत्री ने अपने परिवार को जमीन खरीदने के संकेत दिए थे।
उन्होंने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को पहले से यह जानकारी हो कि किसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सरकारी निवेश होने वाला है और उसके बाद उस जानकारी के आधार पर जमीन खरीदी जाती है, तो यह गंभीर जांच का विषय है। सांसद ने इसे सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
अपने बयान में संजय सिंह ने केंद्र और भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार का मामला किसी विपक्षी नेता से जुड़ा होता तो अब तक राष्ट्रीय स्तर पर खबरें चल रही होतीं और जांच एजेंसियां सक्रिय हो चुकी होतीं।
उन्होंने कहा, “अगर यही काम विपक्ष के किसी नेता ने किया होता, तो अब तक ईडी और सीबीआई के छापे पड़ चुके होते और हर टीवी चैनल पर खबरें चल रही होतीं।” उनके इस बयान को राजनीतिक हमला माना जा रहा है, जिसने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।
राज्यसभा सांसद ने अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और उससे जुड़े विवादों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि करोड़ों हिंदुओं ने अपनी आस्था और विश्वास के साथ मंदिर निर्माण के लिए दान दिया था, लेकिन यदि वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
संजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है और उससे जुड़े किसी भी मामले में पारदर्शिता सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि गठित एसआईटी प्रभावी जांच करने में सफल नहीं रही। उनका कहना था कि यदि समयबद्ध जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती तो लोगों का विश्वास और मजबूत होता।
उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि एसआईटी केवल एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह गई और इससे किसी ठोस परिणाम की उम्मीद पूरी नहीं हुई। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग भी दोहराई।
संजय सिंह ने हाल ही में लखनऊ में एक कोचिंग संस्थान में हुए अग्निकांड का जिक्र करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भवन को केवल एक मंजिल निर्माण की अनुमति मिली थी, तो वहां चार मंजिला इमारत कैसे खड़ी हो गई।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार पिछले नौ वर्षों से अधिक समय से सत्ता में है। ऐसे में अवैध निर्माण, अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही के लिए सरकार जवाबदेह है। सांसद ने सवाल उठाया कि जब वर्षों से भवन से संबंधित कर और अन्य शुल्क वसूले जा रहे थे, तब प्रशासन को निर्माण की वास्तविक स्थिति की जानकारी क्यों नहीं थी।
आप सांसद ने दमकल विभाग में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने विभाग के एक कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि यदि संवेदनशील विभागों में भी खरीद प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा से जुड़े विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि कहीं भी भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता की आशंका है तो उसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
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