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सरकारी इमारती वन भूमि पर कब्जे का प्रयास, उघरपुर में भू-माफिया और लेखपाल की मिलीभगत पर उठे सवाल

सुलतानपुर। जनपद के सदर तहसील क्षेत्र अंतर्गत परगना मीरानपुर के ग्राम सभा उघरपुर में सरकारी वन भूमि पर कथित अवैध कब्जे की कोशिश का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। आरोप है कि ग्राम सभा की बहुमूल्य “इमारती लकड़ी वन” के रूप में दर्ज सरकारी भूमि पर कब्जा करने के लिए कुछ प्रभावशाली लोग सक्रिय हैं। मामले में गांव के एक पूर्व प्रधान और स्थानीय लेखपाल की कथित मिलीभगत की चर्चा भी क्षेत्र में जोर पकड़ रही है। शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री पोर्टल आईजीआरएस और भू-माफिया पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सदर तहसील के ग्राम सभा उघरपुर स्थित गाटा संख्या 230 राजस्व अभिलेखों में “इमारती लकड़ी वन” के रूप में दर्ज है। यह भूमि सरकारी संपत्ति की श्रेणी में आती है और इसका संरक्षण वन संपदा तथा पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। आरोप है कि इस भूमि पर गांव के ही एक पूर्व प्रधान द्वारा स्वामित्व का दावा किया जा रहा है और इसके समर्थन में कथित तौर पर एक पट्टा भी प्रस्तुत किया जा रहा है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि वर्तमान राजस्व अभिलेखों और खतौनी में पूर्व प्रधान अथवा उनके कथित पट्टे का कोई उल्लेख नहीं है। इसके बावजूद सरकारी भूमि पर अधिकार जताने का प्रयास किया जा रहा है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि स्थानीय हल्के के लेखपाल की मदद से सरकारी जमीन के रिकॉर्ड को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जिससे भविष्य में कब्जे का रास्ता आसान हो सके।

जानकारी के मुताबिक, विवादित वन भूमि के बगल में दूसरे ग्राम सभा के एक किसान की निजी भूमि स्थित है। किसान का कहना है कि यदि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा होता है तो उसकी निजी भूमि की सीमाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। इसी आशंका के चलते उसने मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का निर्णय लिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल आईजीआरएस तथा भू-माफिया पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में राजस्व अभिलेखों की जांच, भूमि की पैमाइश तथा कथित फर्जी दावों की सत्यता की जांच कराने की मांग की गई है।

इसके अलावा शिकायतकर्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से जिलाधिकारी सुलतानपुर और उत्तर प्रदेश वन विभाग को भी मामले की जानकारी दी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि गाटा संख्या 230 पर मौजूद इमारती प्रजाति के पेड़ क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा हैं। यदि भूमि पर अवैध कब्जा हो जाता है तो इन पेड़ों के कटान और वन क्षेत्र के नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों का मानना है कि सरकारी वन भूमि पर अतिक्रमण केवल राजस्व का नुकसान नहीं बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है।

क्षेत्र के कई जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर मौके का निरीक्षण कराया जाए। उनका कहना है कि वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए गाटा संख्या 230 की वैज्ञानिक एवं राजस्व मानकों के अनुरूप पैमाइश आवश्यक है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि किसी प्रकार का भ्रम या अभिलेखीय विवाद है तो उसे भी पारदर्शी तरीके से दूर किया जाए। लोगों का मानना है कि सरकारी भूमि पर कब्जे के मामलों में समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर बाद में विवाद और जटिल हो जाते हैं।

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Suyash Chitranshi
Suyash Chitranshi