सुलतानपुर। जनपद सुलतानपुर में बिजेथुआ महावीरन धाम के निकट गोमती नदी पर निर्माणाधीन महावीरन पुल एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। पुल के बीम में दरार आने की खबर और उससे जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना ने न केवल उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और तकनीकी अनियमितताओं के आरोपों को भी हवा दे दी है।
दरार की जानकारी सामने आते ही ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माणाधीन पुल के जिस हिस्से में दरार दिखाई दी, उसे आनन-फानन में बोरे और कपड़ों से ढकने का प्रयास किया गया। इससे यह आशंका और गहरा गई कि कहीं निर्माण में हुई खामियों को छिपाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है।
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस नेता वरुण मिश्र ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे पुल में निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही दरार पड़ना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि यदि शुरुआती चरण में ही पुल की संरचना में कमजोरी दिखाई दे रही है तो भविष्य में इसकी सुरक्षा और मजबूती को लेकर बड़े सवाल खड़े होंगे।
वरुण मिश्र ने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से बनने वाली परियोजनाओं में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि वह जल्द ही जिलाधिकारी इन्द्रजीत सिंह से मुलाकात कर इस मामले की विस्तृत जांच की मांग करेंगे।
वहीं, कादीपुर विधायक राजेश गौतम ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तलब किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को स्वीकार नहीं किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार इस मामले की तकनीकी समीक्षा भी कराई जा सकती है।
गौरतलब है कि गोमती नदी पर बन रहा यह पुल कादीपुर विधानसभा क्षेत्र के गुदरा गांव और लंभुआ विधानसभा क्षेत्र के सलाहपुर गांव को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सेतु है। महावीरन पुल परियोजना का प्रस्ताव वर्ष 2018 में तैयार हुआ था और वर्ष 2019 में इसका निर्माण कार्य शुरू किया गया था। हालांकि विभिन्न कारणों से कार्य कई बार बाधित हुआ और निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजना पूरी नहीं हो सकी।
जानकारी के अनुसार पुल निर्माण परियोजना की मूल स्वीकृत लागत 2146.36 लाख रुपये थी। वर्ष 2020 में अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद विस्तृत ड्राइंग तैयार कर निर्माण कार्य तेज किया गया, लेकिन वर्ष 2022 के बाद काम की गति काफी धीमी पड़ गई। जबकि यह परियोजना वर्ष 2022 तक पूरी हो जानी चाहिए थी, आज भी इसका निर्माण कार्य अधूरा है।
इस पुल के निर्माण की पहल लंभुआ के पूर्व विधायक देवमणि द्विवेदी ने की थी। उनके प्रयासों और सेतु निगम के प्रस्ताव को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को हरी झंडी मिली थी। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि पुल बनने के बाद गोमती नदी के दोनों किनारों पर बसे 25 से अधिक गांवों के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी और नाव पर निर्भरता समाप्त होगी।
लेकिन अब निर्माणाधीन पुल में दरार सामने आने के बाद परियोजना की गुणवत्ता और भविष्य दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोग मामले की निष्पक्ष जांच और निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
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