सुलतानपुर। जनपद की लंभुआ तहसील में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संग्रह सेवक अनिरुद्ध उपाध्याय को निलंबित कर दिया है। आरोप है कि वह सरकारी कार्य कराने और नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूल रहा था। कई शिकायतें मिलने के बाद एसडीएम श्रीमती प्रीति जैन ने मामले की जांच कराई, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। इसके बाद तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की गई।
इस कार्रवाई के बाद तहसील परिसर में दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा। प्रशासन की इस सख्ती को भ्रष्टाचार और दलाली के खिलाफ एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली या आम जनता से धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जानकारी के अनुसार लंभुआ तहसील कार्यालय में तैनात संग्रह सेवक अनिरुद्ध उपाध्याय के खिलाफ पिछले कुछ समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि वह तहसील के सरकारी कार्य शीघ्र कराने और सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से अपने निजी बैंक खाते में पैसे जमा करवा रहा था।
शिकायतकर्ता दिलीप तिवारी ने प्रशासन को बताया कि संग्रह सेवक ने कई लोगों से सरकारी काम कराने और नौकरी लगवाने के नाम पर हजारों रुपये वसूले। एक पीड़ित से लगभग एक लाख रुपये तक लेने का भी आरोप सामने आया। शिकायत मिलने के बाद एसडीएम ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए।
जांच के दौरान आरोपी संग्रह सेवक से लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा गया। हालांकि विभागीय अधिकारियों के अनुसार उसका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। उपलब्ध साक्ष्यों और शिकायतकर्ताओं के बयानों के आधार पर जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद एसडीएम प्रीति जैन ने तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई कर दी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक कार्रवाई है और पूरे मामले की विभागीय जांच आगे भी जारी रहेगी। यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।
एसडीएम प्रीति जैन ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि तहसील के किसी भी सरकारी कार्य के लिए किसी दलाल या बिचौलिये के संपर्क में न आएं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त यदि कोई कर्मचारी या अन्य व्यक्ति पैसे की मांग करता है तो उसकी तत्काल शिकायत प्रशासन से करें।
उन्होंने कहा कि पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देना शासन की प्राथमिकता है तथा किसी भी कर्मचारी द्वारा पद का दुरुपयोग करने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
तहसील कार्यालयों में अक्सर बिचौलियों और दलालों की सक्रियता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार आम नागरिक जानकारी के अभाव में ऐसे लोगों के झांसे में आ जाते हैं और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी सेवाएं निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराई जाती हैं और किसी भी कर्मचारी को अतिरिक्त धनराशि लेने का अधिकार नहीं है।
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