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अमेठी ने खोया अपना ‘दादा’: गौरीगंज के चार बार विधायक तेजभान सिंह का निधन, शोक में डूबा पूरा क्षेत्र

83 वर्ष की आयु में लखनऊ के मैक्स अस्पताल में ली अंतिम सांस, जनसेवा, सादगी और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे भाजपा के वरिष्ठ नेता दादा तेजभान सिंह

सुलतानपुर। अमेठी जनपद की राजनीति और सामाजिक जीवन के लिए शनिवार का दिन बेहद दुखद रहा। गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं लोकतंत्र रक्षक सेनानी दादा तेजभान सिंह का 83 वर्ष की आयु में लखनऊ के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और अस्पताल में उनका उपचार जारी था। उनके निधन की सूचना मिलते ही अमेठी सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों, प्रशासनिक अधिकारियों और हजारों समर्थकों ने गहरा दुख व्यक्त किया।

दादा तेजभान सिंह केवल एक जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि जनता के बीच अपनी सादगी, सहज व्यवहार और सेवा भावना के लिए विशेष पहचान रखते थे। दशकों तक उन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया और क्षेत्र के विकास को अपनी प्राथमिकता रखा। यही कारण था कि गौरीगंज ही नहीं, पूरे अमेठी क्षेत्र में लोग उन्हें स्नेहपूर्वक “दादा” कहकर संबोधित करते थे।

अंतिम संस्कार 5 जुलाई को प्रातः 9 बजे
दादा तेजभान सिंह जी का अंतिम संस्कार रविवार, 5 जुलाई को प्रातः 9 बजे उनके पैतृक आवास अचलपुर (जामों) में किया जाएगा। उनके अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों एवं क्षेत्रवासियों के पहुंचने की संभावना है। उनके निधन के बाद पूरे अमेठी जनपद में शोक का माहौल है और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता लगातार उनके आवास पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से शुरू हुआ सार्वजनिक जीवन
दादा तेजभान सिंह ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में की थी। संघ में रहते हुए उन्होंने राष्ट्र सेवा, संगठन निर्माण और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के साथ सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी राजनीतिक यात्रा अनुशासन, समर्पण और जनहित के मुद्दों पर आधारित रही। उन्होंने हमेशा संगठन और जनता के बीच मजबूत सेतु का कार्य किया। यही कारण रहा कि वे लंबे समय तक क्षेत्र के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते रहे।

चार बार विधायक बनकर किया क्षेत्र का प्रतिनिधित्व
भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर दादा तेजभान सिंह ने गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र का चार बार प्रतिनिधित्व किया। अपने विधायक कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, पेयजल, विद्युत और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए लगातार प्रयास किए। विकास कार्यों के साथ-साथ उन्होंने जनता की व्यक्तिगत समस्याओं को भी गंभीरता से सुना और उनके समाधान के लिए हमेशा उपलब्ध रहे। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर कस्बों तक उनकी सक्रिय उपस्थिति उन्हें एक जनप्रिय नेता के रूप में स्थापित करती रही। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर वे सभी वर्गों के लोगों के बीच समान रूप से सम्मानित रहे।

सादगी और मिलनसार व्यक्तित्व थी सबसे बड़ी पहचान
राजपूत समाज के प्रभावशाली नेता होने के बावजूद दादा तेजभान सिंह की पहचान केवल किसी एक समाज तक सीमित नहीं रही। उन्होंने सभी जातियों, वर्गों और समुदायों के लोगों के साथ समान व्यवहार किया। उनकी सादगी, सहज उपलब्धता और विनम्र स्वभाव ने उन्हें हर वर्ग का प्रिय बना दिया था। क्षेत्र के लोग बताते हैं कि आम नागरिक भी बिना किसी संकोच के अपनी समस्या लेकर उनके पास पहुंच जाता था और दादा पूरी गंभीरता से उसकी बात सुनते थे। यही व्यवहार उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाता था।

लोकतंत्र रक्षक सेनानी के रूप में निभाई अहम भूमिका
दादा तेजभान सिंह को लोकतंत्र रक्षक सेनानी के रूप में भी सम्मान प्राप्त था। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और जनहित के मुद्दों पर उन्होंने हमेशा स्पष्ट और मजबूत भूमिका निभाई। सार्वजनिक जीवन में उनकी ईमानदारी, सादगी और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता को राजनीतिक विरोधी भी स्वीकार करते थे। उनका संपूर्ण जीवन सामाजिक समरसता, राष्ट्रहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित रहा। यही कारण है कि उनके निधन को केवल एक राजनीतिक क्षति नहीं, बल्कि सामाजिक और वैचारिक क्षति भी माना जा रहा है।

निधन की खबर से शोक में डूबा अमेठी
शनिवार को उनके निधन की सूचना मिलते ही अमेठी जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर फैल गई। भाजपा कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। बड़ी संख्या में समर्थकों ने इसे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि दादा तेजभान सिंह ने राजनीति को कभी व्यक्तिगत लाभ का माध्यम नहीं बनाया। उन्होंने सदैव जनता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और अपने जीवन के अंतिम समय तक जनहित के प्रति समर्पित रहे।

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Suyash Chitranshi
Suyash Chitranshi