सुल्तानपुर। जिले के खैराबाद स्थित ऐतिहासिक इमामबाड़ा बेगम हुसैन अकबर में गुरुवार की रात ईद-ए गदीर के अवसर पर एक भव्य धार्मिक महफिल का आयोजन किया गया। महफिल में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की और हजरत अली की वेलायत तथा ईद-ए गदीर की अहमियत पर आधारित तकरीरों और कलामों को सुना। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अंबेडकर नगर के जलालपुर से आए प्रसिद्ध धर्मगुरु मौलाना सईद हसन रज़ाई रहे, जिन्होंने ईद-ए गदीर के धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
हजरत अली की वेलायत का ऐलान था गदीर का संदेश
अपने संबोधन में मौलाना सईद हसन रज़ाई ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद ने हजरत अली के सम्मान और नेतृत्व को लेकर स्पष्ट संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि इस्लामी इतिहास में गदीर का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन हजरत अली की वेलायत का सार्वजनिक ऐलान किया गया था।
मौलाना ने बताया कि 10 हिजरी में हज से वापसी के दौरान गदीर के मैदान में अल्लाह का हुक्म पैगंबर मोहम्मद पर नाजिल हुआ था। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद बड़ी संख्या में हाजियों के सामने हजरत अली की वेलायत और नेतृत्व की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक घटना की याद में हर वर्ष ईद-ए गदीर मनाई जाती है, जिसे “ईद-ए अकबर” अर्थात सभी ईदों से बड़ी ईद के रूप में भी जाना जाता है।
अच्छे कर्मों और जरूरतमंदों की मदद का संदेश
मौलाना रज़ाई ने कहा कि ईद-ए गदीर केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि समाज में भाईचारे, इंसानियत और नेक अमल का संदेश देने वाला दिन है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर नए वस्त्र पहनना, रोजा रखना, नमाज अदा करना, गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना तथा लोगों को भोजन कराना अत्यंत पुण्य का कार्य माना गया है।
उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे इस दिन को धार्मिक उत्साह और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाएं तथा समाज में प्रेम, एकता और सहयोग की भावना को मजबूत करें।
गदीर के महत्व को याद रखने का किया आह्वान
अपने संबोधन में मौलाना ने कहा कि इतिहास में कई ऐसे प्रयास हुए हैं जिनके माध्यम से गदीर के महत्व को कम करने की कोशिश की गई। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस दिन की धार्मिक और ऐतिहासिक अहमियत को समझें तथा नई पीढ़ी को भी इसके बारे में जागरूक करें।
उन्होंने कहा कि गदीर का संदेश न्याय, नेतृत्व, ईमानदारी और मानवता की सेवा का संदेश है, जिसे समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
बच्चों और शायरों ने पेश किए कलाम
महफिल का संचालन प्रसिद्ध शायर और वक्ता ज़ायर अब्बास जलालपुरी ने किया। कार्यक्रम के दौरान बबर अली, एज़ा, ताहा, मूसा, शोएब कासिम, अब्बास, ज़ाहिद इमाम, शफाअत हुसैन, शमीम हैदर, सादिक इमाम, अकील मिर्जा, मोहम्मद हैदर तथा जमीर सैदपुरी सहित मदरसे के बच्चों और अन्य प्रतिभागियों ने अपने खूबसूरत कलाम और मनकबत पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया।
सैकड़ों अकीदतमंदों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में आलम रिज़वी, अज़ादार हुसैन, ज़ाहिद अकबर, मास्टर रफअत हुसैन, नसीम हुसैन, सैफ सहित क्षेत्र के सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे। पूरी महफिल श्रद्धा, आध्यात्मिकता और धार्मिक उत्साह के माहौल में संपन्न हुई।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक शबीह हैदर ने सभी अतिथियों, धर्मगुरुओं और उपस्थित जनसमुदाय का आभार व्यक्त किया तथा ईद-ए गदीर की मुबारकबाद देते हुए समाज में अमन, भाईचारे और इंसानियत के संदेश को आगे बढ़ाने की अपील की।
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