azad-verma-murder-case-anoop-sanda-house-arrested-sultanpur

आजाद वर्मा हत्याकांड के बाद सुलतानपुर में प्रशासन सख्त, सपा प्रवक्ता अनूप संडा नजरबंद; बोले- ‘आवाज दबाने की हो रही साजिश’

सुलतानपुर। गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के कारी बहार गांव में हुए चर्चित आजाद वर्मा हत्याकांड के बाद सुलतानपुर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक अनूप संडा को उनके शहर स्थित आवास पर ही नजरबंद कर दिया गया। पुलिस ने धारा 163 के तहत नोटिस तामील करते हुए उन्हें घर से बाहर न निकलने के निर्देश दिए।

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जिले की राजनीति गरमा गई है। अनूप संडा ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के उद्देश्य से उठाया गया है।

आजाद वर्मा की हत्या के बाद जिले में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। मृतक के परिजन अब भी आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और एनकाउंटर की मांग पर अड़े हुए हैं।

रविवार सुबह पुलिस टीम पूर्व विधायक अनूप संडा के आवास पहुंची और उन्हें धारा 163 के तहत नोटिस तामील करते हुए घर से बाहर न निकलने का आदेश दिया। बताया गया कि प्रशासन को आशंका थी कि उनके घटनास्थल पहुंचने से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी कारण एहतियातन यह कार्रवाई की गई।

इससे पहले सोमवार को लंभुआ विधानसभा सीट से टिकट के दावेदार एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष को भी नोटिस देकर नजरबंद किया गया था। प्रशासन लगातार उन राजनीतिक नेताओं पर नजर बनाए हुए है, जिनके घटनास्थल पर पहुंचने से भीड़ जुटने या विरोध प्रदर्शन की आशंका जताई जा रही है।

नजरबंद किए जाने के बाद अनूप संडा ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि उत्तर प्रदेश में “गजब सुशासन” चल रहा है, जहां विपक्षी नेताओं को जनता के बीच जाने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से रोकने के लिए धारा 163 की नोटिस देकर नजरबंद किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार अपराध रोकने में असफल है तो विपक्ष को घर में कैद करके कुछ समय के लिए जनता की आवाज दबाई जा सकती है, लेकिन इससे जनता की समस्याएं समाप्त नहीं होंगी।

संडा ने अपने बयान में सरकार की कार्यशैली की तुलना हिटलर और मुसोलिनी की विचारधारा से करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने की उम्मीद करना अब केवल एक दिवास्वप्न बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि समाजवादी कार्यकर्ता जनता के मुद्दों को उठाते रहेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि आम जनता के दुख-दर्द को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाना उनका कर्तव्य है तथा सरकार की गलत नीतियों का सार्वजनिक विरोध करना उनका संवैधानिक अधिकार है। साथ ही उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि सरकार जनता द्वारा चुनी हुई शासक है, लेकिन सरकार ही देश नहीं है।

गौरतलब है कि गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के कारी बहार गांव में रविवार शाम आजाद वर्मा को गोली मार दी गई थी। गंभीर हालत में उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में लखनऊ रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

सोमवार दोपहर उनका शव गांव पहुंचा, जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। मृतक के अंतिम संस्कार में भी विलंब हुआ क्योंकि परिजन आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।

पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हत्या की यह वारदात करीब दो वर्षों से चली आ रही पुरानी रंजिश का परिणाम है। हालांकि मामले की विस्तृत जांच अभी भी जारी है।

मृतक के परिजनों की तहरीर पर छह नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सूरज पांडेय, सत्यम पांडेय और रुपम पांडेय को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

हालांकि मृतक के परिजन पुलिस कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। परिजन लगातार एनकाउंटर की मांग कर रहे हैं।

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी प्रकार की अफवाह, प्रदर्शन या हिंसक स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

Author Profile

Suyash Chitranshi
Suyash Chitranshi