पूर्व विधायक और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के बाद अब धर्मेन्द्र राजू चौधरी को भी घर में रोका गया
सुलतानपुर। गोसाईंगंज क्षेत्र में चर्चित आजाद वर्मा हत्याकांड के बाद सुलतानपुर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है। पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ समाजवादी पार्टी नेता अनूप संडा के बाद अब सपा के नगर अध्यक्ष धर्मेन्द्र राजू चौधरी को भी उनके आवास पर नजरबंद कर दिया गया। प्रशासन ने उन्हें घटनास्थल पर जाने से रोक दिया, जिसके बाद उन्होंने प्रदेश सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।
हत्याकांड को लेकर जिले में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है, जबकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। दूसरी ओर, पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए गोसाईंगंज हत्याकांड के तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि मृतक के परिजन अब भी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और एनकाउंटर की मांग पर अड़े हुए हैं।
सोमवार को पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ सपा नेता अनूप संडा को घटनास्थल पर जाने से रोके जाने के बाद मंगलवार को समाजवादी पार्टी के सुलतानपुर नगर अध्यक्ष धर्मेन्द्र राजू चौधरी को भी उनके आवास पर ही रोक दिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी संभावित तनावपूर्ण स्थिति से बचने के उद्देश्य से उठाया गया है।
हालांकि धर्मेन्द्र राजू चौधरी ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। उनका आरोप है कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं को उठाना और पीड़ित परिवार से मिलना जनप्रतिनिधियों का अधिकार है, लेकिन प्रशासन उन्हें ऐसा करने से रोककर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रहा है।
नजरबंद किए जाने के बाद धर्मेन्द्र राजू चौधरी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उनका कहना था कि विपक्षी नेताओं को रोककर सरकार वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों की आवाज को दबाने की साजिश की जा रही है। राजनीतिक हलकों में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक कदमों पर नाराजगी जताई है, जबकि प्रशासन अपनी कार्रवाई को पूरी तरह एहतियाती बता रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोमवार को पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष को भी प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी ऐसे कदम को रोकना आवश्यक है जिससे तनाव बढ़ने की आशंका हो।
सूत्रों के अनुसार प्रशासन लगातार संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और सभी राजनीतिक गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।
घटना के बाद पूरे जिले में पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर लगातार गश्त की जा रही है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कानून अपने तरीके से काम कर रहा है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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