सुलतानपुर। जिले के रामराजी सरस्वती शिशु बालिका विद्या मंदिर इंटरमीडिएट कॉलेज में 22 जून से 30 जून तक आयोजित समर कैंप का समापन मंगलवार को उत्साह, सांस्कृतिक रंग और छात्राओं की शानदार प्रस्तुतियों के बीच संपन्न हुआ। नौ दिनों तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में छात्राओं ने न केवल शास्त्रीय संगीत, कथक, वादन और कोडिंग जैसी गतिविधियों में भाग लिया, बल्कि अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास का भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शमफोर्ड इंटर कॉलेज की डांस अध्यापिका संध्या श्रीवास्तव उपस्थित रहीं। उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए भारतीय संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि संस्कृति ही प्रत्येक व्यक्ति की वास्तविक पहचान होती है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे मंच और कार्यक्रम बच्चों के भीतर आत्मविश्वास विकसित करते हैं तथा उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान भोलेनाथ के मंदिर में पूजा-अर्चना तथा मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर की गई। इस दौरान विद्यालय परिवार, छात्राओं एवं अतिथियों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में सहभागिता निभाई।
मुख्य अतिथि संध्या श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में आयोजित होने वाले ऐसे समर कैंप बच्चों के सर्वांगीण विकास का माध्यम बनते हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, आत्मविश्वास और रचनात्मकता का विकास होता है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रतिभा के साथ निरंतर अभ्यास और सकारात्मक सोच भी जरूरी है। छोटे-छोटे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने से मंच का डर दूर होता है और व्यक्तित्व निखरता है।
विद्यालय की आचार्य कुसुम श्रीवास्तव एवं रंजना मिश्रा ने मुख्य अतिथि संध्या श्रीवास्तव का बैज लगाकर स्वागत किया। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्ष दीक्षा वर्मा ने उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।
22 जून से प्रारंभ हुए समर कैंप में छात्राओं को विभिन्न रचनात्मक एवं शैक्षिक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। संगीताचार्य रोली श्रीवास्तव तथा आचार्य निशा सिंह के निर्देशन में शिशु वर्ग के छात्र-छात्राओं को खेल गतिविधियों के साथ-साथ कोडिंग, गायन, वादन और कथक नृत्य का प्रशिक्षण दिया गया। विशेष बात यह रही कि कथक नृत्य का प्रशिक्षण विद्यालय की पूर्व छात्रा सौम्यता मिश्रा ने दिया। इससे वर्तमान छात्राओं को विद्यालय की पूर्व छात्रा से सीखने और प्रेरणा लेने का अवसर मिला।
समापन समारोह में छात्राओं ने अपनी सीखी हुई कला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति में संस्तिथा श्रीवास्तव और संस्कृति श्रीवास्तव ने राग भैरवी और राग यमन की बंदिश प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब सराहना प्राप्त की।
कथक नृत्य की प्रस्तुति में हिमांशी और आकृति ने भूमि प्रणाम एवं गुरु वंदना प्रस्तुत कर भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का सुंदर संदेश दिया। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित सभी अतिथियों और अभिभावकों का मन मोह लिया। वाद्य संगीत में देवांश मिश्रा ने तबले पर तीनताल का कायदा एवं पलटा प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वहीं ऋतंभरा और लिली कसौधन ने हारमोनियम पर भजन प्रस्तुत कर कार्यक्रम में भक्ति रस का वातावरण बना दिया। इसके अलावा छात्राओं ने शास्त्रीय नृत्य “घर मोरे परदेसिया, आओ पधारो पिया” पर सामूहिक प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं की प्रस्तुतियों में अनुशासन, अभ्यास और कला के प्रति समर्पण स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
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