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ग्रीष्मावकाश के बाद सरस्वती शिशु मंदिर में बच्चों का हुआ स्वागत, सुंदरकांड पाठ से नए शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ

सुलतानपुर। ग्रीष्मावकाश समाप्त होने के बाद बुधवार को नगर के विवेकानंद नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में नए उत्साह और उमंग के साथ शैक्षणिक गतिविधियों का शुभारंभ हुआ। लंबे अवकाश के बाद जब बच्चे विद्यालय पहुंचे तो पूरे परिसर में उत्साह, ऊर्जा और उल्लास का माहौल देखने को मिला। विद्यालय परिवार ने सभी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत को विशेष और प्रेरणादायी बनाने के उद्देश्य से विद्यालय की प्रातःकालीन वंदना सभा में भव्य एवं पावन सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यालय परिसर को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। छात्रों, शिक्षकों एवं विद्यालय परिवार ने श्रद्धा और भक्ति के साथ सुंदरकांड का पाठ किया तथा सभी के मंगलमय भविष्य की प्रार्थना की।

विद्यालय प्रशासन की ओर से आयोजित सुंदरकांड पाठ का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सकारात्मक सोच और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना भी था। वंदना सभा के दौरान पूरा परिसर भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार से गूंज उठा, जिससे विद्यालय का वातावरण अत्यंत शांत, प्रेरणादायी और आध्यात्मिक बन गया।

विद्यालय के शिक्षकों ने विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक सत्र के महत्व से अवगत कराते हुए नियमित अध्ययन, अनुशासन और संस्कारों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और संस्कारी नागरिक बनने की प्रक्रिया भी है।

करीब दो माह के ग्रीष्मावकाश के बाद विद्यालय लौटे विद्यार्थियों के चेहरों पर उत्साह और खुशी साफ दिखाई दी। बच्चे अपने मित्रों और शिक्षकों से मिलकर बेहद प्रसन्न नजर आए। विद्यालय परिसर में एक बार फिर बच्चों की चहल-पहल और मुस्कान ने जीवंत वातावरण का निर्माण कर दिया।

विद्यालय परिवार ने सभी भैया-बहनों का स्नेहपूर्वक स्वागत करते हुए उन्हें नए सत्र के लिए शुभकामनाएं दीं। शिक्षकों ने विद्यार्थियों से अवकाश के दौरान प्राप्त अनुभव साझा करने के लिए भी प्रेरित किया, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास और संवाद कौशल का विकास हो सके।

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Suyash Chitranshi
Suyash Chitranshi