सुलतानपुर। जिले के चांदा थाना क्षेत्र में युवकों के साथ कथित मारपीट, लूटपाट और जबरन धार्मिक नारे लगवाने के आरोपों को लेकर मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। सोमवार को कांग्रेस नेताओं ने पीड़ित पक्ष के साथ जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा एफआईआर में गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पीड़ित की मूल तहरीर में बदलाव कर हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और कई नामजद आरोपियों को बचाने का प्रयास किया।
जानकारी के अनुसार, प्रतापगढ़ जिले के आसपुर देवसरा निवासी आफताब आलम ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि वह अपने रिश्तेदार जीशान के साथ दोस्तपुर से ढकवा बाजार की ओर जा रहे थे। आरोप है कि रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया और विवाद शुरू कर दिया।
पीड़ित के मुताबिक कमल, चंदन, सूरज राजा समेत तीन अज्ञात लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज की और बाद में गंभीर रूप से मारपीट की। आरोप है कि इस दौरान उनसे जबरन जय श्री राम के नारे लगाने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर उनके रिश्तेदारों को भी निशाना बनाया गया और उनके साथ भी मारपीट की गई।
शिकायती पत्र में पीड़ित ने आरोप लगाया है कि हमलावरों ने उनके पास मौजूद 25 हजार रुपये नकद और एक ड्रिल मशीन भी छीन ली। इतना ही नहीं, घटना का वीडियो बनाकर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
पीड़ित का कहना है कि घटना के बाद वह मानसिक रूप से भयभीत और शारीरिक रूप से अस्वस्थ था, जिसके कारण तत्काल थाने नहीं पहुंच सका। बाद में जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो उसने 11 जून को चांदा थाने में पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
आफताब आलम ने पुलिस कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस ने उनकी मूल तहरीर को नजरअंदाज कर अपनी ओर से तैयार किए गए दस्तावेज पर हस्ताक्षर करा लिए।
पीड़ित के अनुसार दर्ज एफआईआर में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य आरोपियों के नाम बदल दिए गए, कुछ नाम पूरी तरह हटा दिए गए तथा लूटपाट और धार्मिक उत्पीड़न से जुड़े आरोपों का उल्लेख भी नहीं किया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पुलिस ने उन पर मनमाफिक बयान देने का दबाव बनाया और घटना की वास्तविकता को कमजोर करने का प्रयास किया।
मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि यदि वायरल वीडियो और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जाए तो घटना की सच्चाई सामने आ सकती है।
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, वीडियो को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में शामिल किया जाए तथा एफआईआर में घटना की प्रकृति के अनुरूप गंभीर धाराएं जोड़ी जाएं। साथ ही जिन आरोपियों के नाम शिकायत में बताए गए हैं, उन्हें भी मुकदमे में शामिल कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
पीड़ित आफताब आलम ने जिलाधिकारी से अपील की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए ताकि उन्हें न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
Author Profile

Latest entries
Breaking NewsJuly 26, 2026सुलतानपुर विधानसभा 2027: सपा से एडवोकेट अशोक सिंह बिसेन हो सकते हैं प्रत्याशी, पार्टी नेतृत्व में लगातार चर्चा
Breaking NewsJuly 22, 2026शिक्षा और लोकतंत्र के समर्थन में सपा का आंदोलन तेज, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन; तिकोनिया पार्क में रोजाना धरने का ऐलान
Breaking NewsJuly 19, 2026जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने पर सपा का हमला, अशोक सिंह बिसेन बोले- लोकतंत्र और मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार
Breaking NewsJuly 10, 2026भाजपा सरकार भ्रष्टाचार, अपराध और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ की जिम्मेदार: एडवोकेट अशोक सिंह बिसेन
