सुलतानपुर। जिले के औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सुलतानपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे करीब 200 एकड़ भूमि पर नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि 200 एकड़ से कम भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं किया जाएगा। ऐसे में पहले भेजे गए 123 एकड़ भूमि के प्रस्ताव को अपर्याप्त मानते हुए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जिले में लंबे समय से बड़े उद्योगों की कमी के कारण रोजगार और निवेश की संभावनाएं सीमित रही हैं। अब सरकार की इस पहल से न केवल औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।
जानकारी के अनुसार फरवरी माह में प्रशासन की ओर से लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित भूमि को चिन्हित कर शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें सरैयापूरे बिषेन गांव में 47 गाटों की 15.5260 हेक्टेयर भूमि तथा ऊंचगांव में 123 गाटों की 36.1640 हेक्टेयर भूमि को शामिल किया गया था। दोनों क्षेत्रों की कुल भूमि लगभग 51 हेक्टेयर (करीब 123 एकड़) होती है।
प्रशासन को उम्मीद थी कि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद जिले में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का रास्ता साफ हो जाएगा। सूत्रों के मुताबिक यूपीसीडा (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) ने इस भूमि के लिए मौखिक सहमति भी प्रदान कर दी थी, लेकिन शासन ने औद्योगिक क्षेत्र के लिए और अधिक भूमि उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई है।
प्रदेश सरकार का मानना है कि बड़े औद्योगिक निवेश आकर्षित करने और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए औद्योगिक क्षेत्र का आकार पर्याप्त होना चाहिए। इसी वजह से शासन ने प्रस्तावित भूमि को नाकाफी बताते हुए 200 एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है।
इसके बाद प्रशासन ने अतिरिक्त लगभग 80 एकड़ भूमि की तलाश शुरू कर दी है। इस संबंध में तहसील सदर के एसडीएम को आवश्यक कार्रवाई करने और उपयुक्त भूमि चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं। भूमि उपलब्ध होने के बाद उसके अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
सुलतानपुर में औद्योगिक विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से उपयुक्त भूमि की तलाश की जा रही है। जिले में वर्तमान समय में कोई ऐसा बड़ा औद्योगिक क्षेत्र नहीं है, जहां बड़े पैमाने पर औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की जा सके।
इसी कमी को दूर करने के लिए प्रशासन लगातार भूमि चिन्हित करने और निवेशकों को आकर्षित करने की दिशा में प्रयास कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से जिले की आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
दूसरी तरफ, जयसिंहपुर क्षेत्र के कारेबन सहित आसपास के गांवों में यूपीडा के माध्यम से लगभग 335 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे औद्योगिक गलियारे पर भी कार्य जारी है। हालांकि यह परियोजना अभी अंतिम रूप नहीं ले पाई है, लेकिन इसे तेजी से आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
भूमि संबंधी चुनौतियों के कारण जिले में दूसरा बड़ा औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। अब शासन की नई पहल से यह बाधा दूर होने की संभावना जताई जा रही है।
इस संबंध में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) राकेश सिंह ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार 200 एकड़ से कम क्षेत्रफल में औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं किया जाएगा। शासन ने प्रस्तावित भूमि के अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने को कहा है और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं।
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