सुलतानपुर। शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और शिक्षकों को आधुनिक एवं उद्देश्यपरक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से कादीपुर के झारखंड स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में शनिवार को प्रशिक्षण वर्ग एवं प्रश्न पत्र निर्माण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। विद्या भारती की योजना के अनुरूप आयोजित इस कार्यशाला में विद्यालय के प्रधानाचार्य अवधेश कुमार मिश्रा के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन में सभी विषयों के आचार्यों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, छात्र-केंद्रित एवं परिणामोन्मुख बनाना तथा परीक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय शिक्षा दृष्टि और विद्या भारती की शिक्षण योजना के अनुरूप विकसित करना रहा। कार्यक्रम के दौरान पंचपदी शिक्षण पद्धति, गुणवत्तापूर्ण प्रश्न पत्र निर्माण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते शैक्षिक परिवेश में केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, चिंतन क्षमता और व्यवहारिक दक्षता का विकास भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विद्यालय स्तर पर इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में सभी विषयों के आचार्यों को पंचपदी शिक्षण पद्धति के विभिन्न चरणों का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान शिक्षण को अधिक रोचक, सहभागितापूर्ण और व्यवहारिक बनाने के विभिन्न उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
आचार्यों ने चर्चा की कि यदि कक्षा शिक्षण को योजनाबद्ध, उद्देश्यपरक और विद्यार्थियों की सहभागिता पर आधारित बनाया जाए तो सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होती है। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षण की ऐसी विधियों पर भी मंथन किया गया, जिनसे विद्यार्थियों में विषय के प्रति रुचि बढ़े और वे केवल परीक्षा तक सीमित न रहकर व्यावहारिक ज्ञान भी प्राप्त कर सकें।
विद्यालय प्रशासन ने बताया कि पंचपदी शिक्षण पद्धति विद्यार्थियों की जिज्ञासा, चिंतन क्षमता और आत्मविश्वास को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यही कारण है कि विद्या भारती की शिक्षण व्यवस्था में इस पद्धति को विशेष महत्व दिया जाता है।
कार्यशाला के दूसरे चरण में प्रश्न पत्र निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें सभी विषयों के आचार्यों ने विषयानुसार गुणवत्तापूर्ण प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक अभ्यास किया।
इस दौरान अधिगम उद्देश्यों, प्रश्नों के कठिनाई स्तर, वस्तुनिष्ठ एवं वर्णनात्मक प्रश्नों के संतुलन, अंक विभाजन तथा मूल्यांकन की वैज्ञानिक पद्धति पर विस्तार से चर्चा हुई। शिक्षकों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रश्न पत्र केवल रटने की क्षमता का परीक्षण न करें, बल्कि विद्यार्थियों की समझ, विश्लेषण क्षमता, रचनात्मक सोच और व्यवहारिक ज्ञान का भी मूल्यांकन करें।
कार्यशाला में ज्ञानात्मक, बोधात्मक, कौशल विकास तथा प्रयोगात्मक पक्षों को शामिल करते हुए गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन प्रणाली विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य अवधेश कुमार मिश्रा ने कहा कि किसी भी विद्यालय की सफलता उसके शिक्षकों की गुणवत्ता और निरंतर सीखने की भावना पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा, “शिक्षक का सतत प्रशिक्षण ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार है। यदि शिक्षण प्रक्रिया योजनाबद्ध एवं उद्देश्यपरक होगी तो विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास स्वतः सुनिश्चित होगा।” उन्होंने सभी आचार्यों से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त अनुभवों और नई शिक्षण तकनीकों को नियमित कक्षा शिक्षण में लागू करें, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण मिल सके।
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