सुलतानपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और राजकीय मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को दूबेपुर स्थित मेडिकल कॉलेज परिसर में आयोजित ‘रक्तचाप-26’ महासम्मेलन में देश के प्रतिष्ठित चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने उच्च रक्तचाप, मधुमेह और बदलती जीवनशैली से उत्पन्न बीमारियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री से सम्मानित एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ के निदेशक प्रोफेसर डॉ. आर.के. धीमन ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के कारण गैर-संचारी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं और इनके नियंत्रण के लिए जनजागरूकता के साथ स्वास्थ्य संसाधनों का विस्तार बेहद जरूरी है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित कर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाना है। उन्होंने इसे प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।
महासम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रोफेसर डॉ. आर.के. धीमन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मुख्यमंत्री का विजन है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिले। इसी सोच के तहत प्रदेश के लगभग प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं, जिससे चिकित्सा शिक्षा और उपचार व्यवस्था दोनों को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने से न केवल मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि भविष्य में प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या भी बढ़ेगी।
कार्यक्रम के समापन के बाद मीडिया से बातचीत में जब डॉ. धीमन से पूछा गया कि मेडिकल कॉलेजों और डॉक्टरों की संख्या बढ़ने के बावजूद डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और लीवर संबंधी बीमारियों के मरीज लगातार क्यों बढ़ रहे हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समस्या कोई नई नहीं है।
उन्होंने कहा कि पिछले लगभग 50 वर्षों से जीवनशैली में लगातार बदलाव आया है। शारीरिक गतिविधियों में कमी, अनियमित खानपान, तनाव और मोटापा जैसी समस्याओं के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों के मामले तेजी से बढ़े हैं। आज स्थिति यह है कि पहले जिन बीमारियों को बुजुर्गों की समस्या माना जाता था, वे अब 30 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में भी देखने को मिल रही हैं। हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं कम उम्र के लोगों को भी प्रभावित कर रही हैं।
डॉ. धीमन ने कहा कि जिस गति से बीमारियां बढ़ रही हैं, उसी अनुपात में स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधनों का विकास भी आवश्यक है। केवल डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन और अन्य पैरामेडिकल कर्मियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि करनी होगी। उन्होंने कहा कि मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिकित्सा संस्थानों के साथ प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता भी समान रूप से महत्वपूर्ण है।
महासम्मेलन में भाग लेने के दौरान प्रोफेसर डॉ. आर.के. धीमन ने चिकित्सा महाविद्यालय परिसर स्थित मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच उन्होंने हरिशंकरी का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर उपस्थित चिकित्सकों और अधिकारियों ने भी पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में पद्मश्री सम्मानित प्रोफेसर डॉ. के.के. त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा आईएमए अध्यक्ष एवं वरिष्ठ सर्जन डॉ. ए.के. सिंह, आयोजन सचिव एवं वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी भारत भूषण, राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य तथा जिले के अनेक वरिष्ठ चिकित्सकों ने उच्च रक्तचाप के बढ़ते मामलों, समय पर जांच, रोकथाम और प्रभावी उपचार पर अपने विचार रखे।
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